पिंपरी में आपदा प्रबंधन के दावों की खुली पोल, ऊंची इमारतों के आगे बेबस फायर ब्रिगेड, कागजों पर अर्ली वार्निंग
Pimpri Chinchwad PCMC: पिंपरी-चिंचवड़ में बढ़ते शहरीकरण के बीच आपदा प्रबंधन तंत्र पर सवाल उठे हैं। गगनचुंबी इमारतों के लिए संसाधनों की कमी है और मनपा के पास केवल एक ही एरियल लैडर गाड़ी है।
- Written By: रूपम सिंह
पिंपरी-चिंचवड़ (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Pimpri Chinchwad Disaster Management: पिंपरी-चिंचवड़ शहर का चेहरा तेजी से बदल रहा है। गगनचुंबी इमारतों, बढ़ती आबादी और तेज शहरीकरण ने शहर को आधुनिक विकास की नई पहचान दी है। लेकिन इस विस्तार के साथ प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं का जोखिम भी बढ़ता जा रहा है।
नालों के किनारे बसती बस्तियां, ऊंची इमारतों का जाल और बदलते मौसम के पैटर्न शहर की सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि बादल फटने, भीषण बाढ़ या किसी बड़े संकट की स्थिति उत्पन्न होती है, तो क्या महानगर पालिका और संबंधित एजेंसियां उससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं?
अर्ली वार्निंग सिस्टम का खोखला दावा
आपदा प्रबंधन विभाग का यह दावा है कि उनके पास एक सुदृढ़ ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ मौजूद है, जिसके माध्यम से बांध और सिंचाई विभाग से निरंतर जीवंत संपर्क बनाए रखा जाता है। इस तकनीकी प्रणाली के सहारे वर्षा का सटीक पूर्वानुमान, जलाशयों में उपलब्ध जलसंग्रह की वास्तविक स्थिति और भावी खतरों की महत्वपूर्ण जानकारी प्रशासनिक अमले को समय-समय पर प्राप्त होती रहती है। इसके अतिरिक्त अग्निशमन दल, पुलिस
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प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं क्षेत्रीय कार्यालयों के पारस्परिक समन्वय से संवेदनशील क्षेत्रों को रिक्त कराने, बड़े नालों की सघन सफाई करने तथा प्रभावित नागरिकों के सुचारू पुनर्वास की विस्तृत योजनाएं कागजों पर तैयार की जाती हैं। विभाग अपनी मुख्य ताकतों के अंतर्गत 500 स्वयंसेवकों का एक विशाल नेटवर्क, एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ का विशेष प्रशिक्षण एवं आधुनिक वॉकी-टॉकी प्रणाली की उपलब्धता को प्रमुखता से गिनाता है।
सिर्फ नियंत्रण कक्ष खोलना वास्तविक समाधान नहीं
मनपा प्रशासन प्रत्येक वर्ष मानसून के आगमन से पूर्व तैयारियों के बड़े-बड़े दावे अवश्य करता है। वह चौबीस घंटे नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने की बात कहकर अपनी पीठ थपथपाने से भी पीछे नहीं हटता। इसके विपरीत नगर के प्रबुद्ध जानकारों का स्पष्ट मानना है कि केवल एक आपातकालीन नियंत्रण कक्ष शुरू रख देने मात्र से आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है।
शहर के बढ़ते भौगोलिक दायरे को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन तंत्र को अधिक आधुनिक, त्वरितगामी और अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित बनाने की आवश्यकता है, अन्यथा किसी भी अप्रत्याशित प्राकृतिक या मानव निर्मित बड़ी आपदा का भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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आपदाओं से निबटने में विभाग की परेशानी बढ़ेगी
पिंपरी-चिंचवड़ शहर के भीतर 25 से 30 मंजिला गगनचुंबी इमारतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो अग्निशमन विभाग के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इन गगनचुंबी भवनों में अचानक अग्नि दुर्घटना होने अथवा किसी अन्य आकस्मिक संकट की स्थिति में ऊपरी तलों तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक अत्याधुनिक उपकरणों और विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों की भारी कमी दिखती है। वर्तमान में मनपा के पास 54 मीटर की ऊंचाई तक कार्य करने वाली महज एकमात्र एरियल लैडर प्लेटफॉर्म गाड़ी उपलब्ध है, जो अधिकतम केवल 17 मंजिल तक ही पहुंचने की क्षमता रखती है।
