मानसून पूर्व बारिश ने ही खोली प्रशासन की पोल, बह गए विकास के दावे, गड्ढों में तब्दील हुईं सड़कें
Pre Monsoon Rain: भंडारा शहर में मानसून पूर्व हुई बारिश ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। भूमिगत गटर और पाइपलाइन कार्यों के बाद की गई सड़क मरम्मत पहली ही बारिश में बह गई।
Road Safety Issue (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Damaged Roads Bhandara: मुख्य मानसून के आगमन से पहले हुई शुरुआती बारिश ने ही भंडारा शहर की सड़कों की बदहाली उजागर कर दी है। भूमिगत गटर योजना और जलापूर्ति पाइपलाइन के कार्यों के बाद सड़कों पर डाली गई मुरम, गिट्टी और चुरी पहली ही बारिश में बह गई। इसके साथ ही शहरभर में गड्ढों का जाल फिर से सामने आ गया है। नागरिकों का आरोप है कि सड़क मरम्मत और पैचवर्क पर हर वर्ष लाखोंकरोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका कोई असर दिखाई नहीं देता।
प्रमुख मार्गों की हालत सबसे खराब। पिछले दो वर्षों से शहर की अधिकांश सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं। पांडे महाल, मुस्लिम लाइब्रेरी चौक से बड़ा बाजार मार्ग, जे.एम. पटेल कॉलेज रोड, राजीव गांधी चौक, खांबतालाब चौक, शास्त्री चौक और मुख्य बस स्टैंड क्षेत्र की सड़कें सबसे अधिक प्रभावित हैं। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने से वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
ट्रैफिक जाम और हादसों का बढ़ा खतरा
सड़कों पर बने गहरे गड्ढों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वाहन चालक गड्ढों से बचने के प्रयास में संतुलन खो रहे हैं और छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला सामान्य अस्पताल मार्ग की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां एम्बुलेंस तक को धीमी गति से गुजरना पड़ रहा है।
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व्यापारियों और राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें
सड़क किनारे जमा कीचड़युक्त पानी दुकानों तक पहुंच रहा है। वाहन गुजरने पर पानी और कीचड़ के छींटे दुकानों तथा राहगीरों पर पड़ रहे हैं। इससे व्यापार प्रभावित हो रहा है और लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय की सड़कों की ऐसी स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून पूर्व किए गए मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता का अभाव रहा। यदि कार्य मानकों के अनुसार किए गए होते तो पहली ही बारिश में सड़क की परत नहीं उखड़ती। नागरिकों ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों तथा ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
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कब जागेगा प्रशासन?
मानसून का मुख्य दौर अभी शुरू भी नहीं हुआ है। ऐसे में यदि शुरुआती बारिश में ही सड़कें जवाब दे रही हैं, तो भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं। सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा नगर परिषद से तत्काल पैचवर्क और मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
