NCP विधायक इदरीस नायकवाड़ी से पार्टी ने मांगा इस्तीफा? महाराष्ट्र में बढ़ी सियासी हलचल
Idris Naikwadi NCP: राकांपा विधायक इदरीस नायकवाड़ी को इस्तीफा देने के कथित निर्देश पर महाराष्ट्र में सियासी भूचाल। विधायक बोले- "मैं इस्तीफा नहीं दूंगा।"
- Written By: अनिल सिंह
इदरीस नायकवाड़ी (फोटो क्रेडिट-X)
Idris Naikwadi NCP Resignation: महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान का एक नया मोर्चा खुल गया है। सांगली-मिरज-कुपवाड़ नगर निगम के पूर्व महापौर और राकांपा के अल्पसंख्यक मोर्चे के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे इदरीस नायकवाड़ी के इस्तीफे की खबरों ने सूबे की राजनीति को गरमा दिया है। दिवंगत राकांपा नेता अजीत पवार ने अल्पसंख्यक समुदाय को बड़ा प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से साल 2024 में नायकवाड़ी को राज्यपाल कोटे से विधान परिषद भेजा था। लेकिन अब उनके 6 साल के कार्यकाल के बीच में ही उनसे पद छोड़ने की मांग की खबरों ने सबको चौंका दिया है।
मराठी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 15 दिन पहले मंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) ने नायकवाड़ी से मिलकर उन्हें पद छोड़ने का संदेश दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इन दावों पर पलटवार करते हुए विधायक इदरीस नायकवाड़ी ने कहा, “पार्टी के कुछ लोग अपनी व्यक्तिगत इच्छाएं और महत्वाकांक्षाएं पूरी न होने के कारण ऐसी मनगढ़ंत अफवाहें उड़ा रहे हैं। मुझे पार्टी नेतृत्व या आलाकमान की तरफ से ऐसा कोई भी लिखित या मौखिक संदेश नहीं मिला है। मैं एक विधायक हूं और मुझसे कई ओएसडी मिलते रहते हैं, इसका यह मतलब नहीं कि वे मेरा इस्तीफा लेने आए थे।”
सांगली के मेयर पद के समय भी नायकवाड़ी ने दिखाए थे कड़े तेवर
इदरीस नायकवाड़ी का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि वे दबाव की राजनीति के आगे आसानी से नहीं झुकते। इससे पहले जब वे सांगली मिरज कुपवाड़ नगर निगम के महापौर (Mayor) थे, तब भी उनके कार्यकाल के दौरान कुछ स्थानीय नेताओं ने उनसे समय से पहले इस्तीफा देने की मांग की थी। उस समय भी नायकवाड़ी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पद छोड़ने से साफ मना कर दिया था। अब एक बार फिर उन्होंने अपने पुराने तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं देंगे।
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क्या कल होने वाली राकांपा की बड़ी बैठक में गिरेगी गाज?
पार्टी के भीतर चल रही इस रस्साकशी के बीच कल यानी मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस बैठक के एजेंडे में इदरीस नायकवाड़ी के इस्तीफे का मुद्दा सबसे ऊपर रह सकता है। अगर पार्टी का युवा नेतृत्व उन पर पद छोड़ने का दबाव बनाता है और नायकवाड़ी अपनी बात पर अड़े रहते हैं, तो यह विवाद अजीत पवार गुट के भीतर एक नए विद्रोह को जन्म दे सकता है।
क्या राज्यपाल सीधे स्वीकार कर सकते हैं इस्तीफा?
इस पूरे मामले में एक तकनीकी और कानूनी पेंच भी फंसता नजर आ रहा है। यदि राकांपा नेतृत्व के निर्देश के बावजूद विधायक नायकवाड़ी स्वेच्छा से अपना त्यागपत्र विधानसभा या विधान परिषद के सभापति को नहीं सौंपते हैं, तो पार्टी के पास सीधे तौर पर उन्हें हटाने का अधिकार नहीं होगा। हालांकि, चूंकि यह नियुक्ति राज्यपाल के विशेष कोटे (Governor’s Prerogative) से हुई थी, इसलिए कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैबिनेट कोई विशेष सिफारिश भेजती है, तो राज्यपाल इस पर सीधे दखल दे सकते हैं। अब देखना होगा कि कल की बैठक के बाद सांगली के इस कद्दावर नेता का राजनीतिक भविष्य क्या मोड़ लेता है।
