Ajitrao Ghorpade Defeats BJP Miraj
MVA Victory Sangli ZP Election News: सांगली जिला परिषद के आगामी चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मिरज पंचायत समिति में सत्ता संघर्ष के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता अजितराव घोरपड़े और शिवसेना के मोहन वनखंडे ने मिलकर बीजेपी विधायक सुरेश खाड़े के गढ़ में उनकी सत्ता उखाड़ फेंकी है। महायुति में शामिल होने के कयासों को दरकिनार करते हुए घोरपड़े और वनखंडे ने महाविकास अघाड़ी (MVA) के साथ हाथ मिलाया, जिसके परिणामस्वरूप बीजेपी को अपनी ही बालेकिल्ला में हार का सामना करना पड़ा।
इस चुनाव में कांग्रेस की मात्र 21 वर्षीय तन्वी कमलेकर सभापती (अध्यक्ष) चुनी गई हैं, जिन्होंने बीजेपी की रानी भोरे को 11 के मुकाबले 10 मतों से पराजित किया। कमलेकर की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे नरवाड गण से सबसे कम उम्र की जन-प्रतिनिधि हैं। वहीं, शिवसेना की ललिता शेजुळ उपसभापती चुनी गई हैं। इस उलटफेर ने सांगली की राजनीति में यह संकेत दे दिया है कि जिला परिषद की सत्ता के लिए भी बीजेपी की राह आसान नहीं होने वाली है।
मिरज पंचायत समिति की नई सभापती तन्वी कमलेकर की उम्र महज 21 वर्ष है, और इतनी कम उम्र में उन्होंने बीजेपी जैसे मजबूत संगठन को मात देकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने कवलापूर गण से बीजेपी की उम्मीदवार रानी भोरे को एक वोट के मामूली अंतर से हराया। यह जीत महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस, एनसीपी-शरद पवार, शिवसेना-यूबीटी) और अजितराव घोरपड़े गुट के सफल गठबंधन का परिणाम है। इस हार ने बीजेपी विधायक सुरेश खाड़े की स्थानीय रणनीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बीजेपी की हार की पटकथा अजितराव घोरपड़े और मोहन वनखंडे ने मिलकर लिखी। 22 सदस्यीय पंचायत समिति में बीजेपी के पास 10 सदस्य थे और उन्हें सत्ता के लिए केवल दो और मतों की आवश्यकता थी। हालांकि, घोरपड़े ने अपने 3 सदस्यों को महाविकास अघाड़ी के साथ खड़ा कर दिया। दूसरी ओर, मोहन वनखंडे ने सांगली नगर निगम में हुई पुरानी राजनीतिक अनदेखी का बदला लेने के लिए बीजेपी का साथ नहीं दिया। मतदान के दौरान शिवसेना का एक सदस्य अनुपस्थित रहा, जिससे विपक्षी खेमे का पलड़ा 11 मतों के साथ भारी हो गया।
मिरज पंचायत समिति के इन नतीजों ने सांगली जिला परिषद के चुनावों के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है। वर्तमान में सांगली जिला परिषद में सत्ता स्थापना को लेकर राज्य स्तर पर महाविकास अघाड़ी और महायुति के बीच चर्चा लंबित है, लेकिन जमीनी स्तर पर एनसीपी और शिवसेना के नेताओं ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के 4, कांग्रेस के 3, अजित घोरपड़े गुट के 3 और शिवसेना के 1 सदस्य ने एकजुट होकर यह साबित कर दिया कि यदि क्षेत्रीय नेता एक साथ आएं, तो बीजेपी की ‘नंबर गेम’ की ताकत को चुनौती दी जा सकती है।