कौन हैं प्राजक्ता बोंगले? पहली मराठी महिला जिन्होंने US आर्मी में भारत का नाम किया रोशन
Prajakta Bongale First Marathi Woman in US Army: महाराष्ट्र के रत्नागिरी की प्राजक्ता बोंगले US आर्मी में शामिल होने वाली पहली मराठी महिला बनीं। जानें उनके संघर्ष की कहानी।
- Written By: अनिल सिंह
प्राजक्ता बोंगले, US आर्मी में शामिल होने वाली पहली मराठी महिला (फोटो क्रेडिट-X)
Who is Prajakta Bongale: महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली एक बेटी ने सात समंदर पार अमेरिका में इतिहास रचते हुए पूरे भारत का नाम रोशन किया है। रत्नागिरी जिले के दापोली की रहने वाली प्राजक्ता भाम्बुरे-बोंगले अमेरिकी सेना में शामिल होने वाली पहली मराठी महिला बन गई हैं।
उन्होंने अमेरिकी सेना के बेहद कठिन और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण आठ महीने के मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम को न केवल सफलतापूर्वक पूरा किया, बल्कि अपने पूरे बैच में टॉप करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से पूरे महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में गौरव की लहर है।
दापोली से मुंबई तक की पढ़ाई
प्राजक्ता बोंगले का बचपन से ही सेना में भर्ती होने का सपना था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दापोली के ए. जी. हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने रत्नागिरी के प्रतिष्ठित गोगेट जोगलेकर कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए वह मुंबई आईं और यहां के विख्यात रूपारेल कॉलेज से एंडोक्रिनोलॉजी में एमएससी की उपाधि प्राप्त की। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद प्राजक्ता की शादी हो गई और वह अपने पति के साथ अमेरिका में जाकर बस गईं, जहां उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी संभाला।
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मिसेज यूनिवर्स का खिताब, कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में भी किया काम
सैन्य पृष्ठभूमि न होने के बावजूद प्राजक्ता बहुमुखी प्रतिभा की धनी रही हैं। अमेरिका में रहते हुए उन्होंने एक क्लिनिकल रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया। इसके साथ ही, उन्होंने ग्लोबल स्ट्रेटेजिक एलायंस मिलेट्स एंबेसडर के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व भी किया। मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया में कदम रखते हुए प्राजक्ता ने अपनी खूबसूरती और बुद्धिमत्ता के दम पर ‘यूएसए मिसेज मिडवेस्ट यूनिवर्स’ जैसी प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता का खिताब भी अपने नाम किया।
हादसे से उबरकर पूरा किया बचपन का सपना
प्राजक्ता के सफर में एक ऐसा मोड़ भी आया था जब दापोली में पढ़ाई के दौरान एक अप्रत्याशित हादसे के कारण उन्हें अपने सैन्य सपने को कुछ समय के लिए छोड़ना पड़ा था। लेकिन देश और समाज की सेवा के उनके अटूट संकल्प ने उन्हें हार नहीं मानने दी। उन्होंने नियमित व्यायाम, अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक सोच के बल पर अपनी फिटनेस को वापस पाया। आठ महीने के कड़े सैन्य प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सर्वोच्च शैक्षणिक अंक प्राप्त किए और उनकी उत्कृष्ट निशानेबाजी के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘मार्क्समैनशिप मेडल’ से भी नवाजा गया। वर्तमान में उन्हें यूएस आर्मी के मेडिकल डिवीजन में आधिकारिक तौर पर कमीशन मिल चुका है।
