पनवेल में रीडेवलपमेंट की राह हुई आसान, हाई कोर्ट ने सिडको क्षेत्र में TDR पॉलिसी को दी मंजूरी

CIDCO Redevelopment Rules: पनवेल के सिडको क्षेत्रों में अब TDR के जरिए निर्माण और पुनर्विकास का रास्ता साफ हो गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार की नीति को वैध बताते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
Panvel CIDCO TDR Policy Bombay High Court Approval Real Estate Redevelopment
बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Panvel CIDCO TDR Policy: नवी मुंबई और पनवेल के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पनवेल महानगरपालिका के अंतर्गत आने वाले सिडको (CIDCO) क्षेत्रों में टीडीआर (Transferable Development Rights) के इस्तेमाल की अनुमति देने वाली राज्य सरकार की नीति को सही ठहराया है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने इस नीति के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह कानूनन सही है।

क्या था पूरा विवाद?

पनवेल महानगरपालिका बनने के बाद डेवलपर पनवेल शहर और पनवेल ग्रामीण के 29 गांवों में टीडीआर के जरिए बिल्डिंग बना सकते थे, लेकिन बढ़ा हुआ टीडीआर सिडको लिमिट में नए कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट और पुरानी बिल्डिंग के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में लागू नहीं था, इसलिए कंस्ट्रक्शन प्रोफेशनल्स एसोसिएशन ने मांग की थी कि प्रीमियम चार्ज करके सिडको लिमिट में टीडीआर की इजाजत दी जाए।

हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले काे सही ठहराया

राज्य के टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के बाद कुछ शर्तों के साथ यह इजाजत देने की मंजूरी दी गई, बताया गया कि 7 अक्टूबर, 2024 को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया और जॉइंट डेवलपमेंट कंट्रोल प्रमोशन रूल्स में सेक्शन 10.16 को शामिल किया गया। साथ ही, सरकार ने यह भी साफ किया था कि यह पॉलिसी पनवेल मनपा के डेवलपमेंट प्लान को मंजूरी मिलने तक लागू रहेगी। लेकिन, इस फैसले को अलग-अलग याचिकाओं के जरिए बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने याचिकाओं को खारिज कर दिया और सरकार की पॉलिसी को सही ठहराया।

MRTP एक्ट के खिलाफ नहीं

राज्य सरकार की दलीलों से कोर्ट सहमत था और मामले की स्टडी करने के बाद हमें 15 मार्च, 2024 के पॉलिसी नोटिस या 7 अक्टूबर, 2024 के नोटिफिकेशन को चुनौती देने में कोई दम नहीं मिला। असल में कोर्ट ने पॉलिसी के खिलाफ याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि नोटिफिकेशन को गैर-कानूनी और मुंबई रीजनल टाउन प्लानिंग एक्ट के खिलाफ नहीं पाया गया और यह अमेंडमेंट ग्रॉस परमिसिबल फ्लोर एरिया इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं करता है या टीडीआर फ्रेमवर्क को खत्म नहीं करता है।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी रेगुलेशन को सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह कमर्शियल उम्मीदों या मार्केट वैल्यू को प्रभावित करता है, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के उन दावों को भी खारिज कर दिया कि अमेंडमेंट गैर-कानूनी लेवी लगाता है।

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