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Pune: 75 साल से पुल का इंतज़ार! चिंचणी-बोरी के लोग अब भी मौत के जोखिम पर नदी पार करने को मजबूर
Pune के शिरूर तहसील में स्थित चिंचणी और अहिल्यानगर के 2 गांवों को जोड़ने वाली घोड़ नदी पर पिछले 75 साल से कोई स्थायी पुल नहीं है। जिसके कारण गांववालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Pune News In Hindi: शिरूर तहसील के पूर्वी हिस्से में स्थित चिंचणी और अहिल्यानगर जिले के श्रीगोंदा तहसील के बोरी नामक दो गांवों को जोड़ने वाली घोड़ नदी पर पिछले 75 वर्षों से कोई स्थायी पुल नहीं है।
इस गंभीर समस्या के कारण दोनों गांवों के निवासियों को अपने दैनिक आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति हर साल, विशेष रूप से मानसून के दौरान, तब और भी भयावह हो जाती है जब घोड़ बांध से नदी के तल में पानी छोड़ा जाता है। पानी के प्रवाह से दोनों गांवों के बीच का संपर्क पूरी तरह से टूट जाता है, जिसके कारण हजारों ग्रामीणों का जीवन प्रभावित होता है।
चिंचणी-बोरी का यह मार्ग पुणे और अहिल्यानगर जिलों को जोड़ने वाला सबसे निकटतम रास्ता है। इस मार्ग का उपयोग दैनिक रूप से स्कूली बच्चे, किसान, श्रमिक और बीमार लोग करते हैं। नदी में पानी का गहरा स्तर, तेज बहाव और नदी तल में मौजूद गड्ढे इस यात्रा को अत्यंत खतरनाक बना देते हैं।
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राजनीतिक उपेक्षा और अधूरे वादे
कई बार पानी के बीच से गुजरते समय दुपहिया वाहनों के गिरने से छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। बारिश के दौरान, ग्रामीण नाव का सहारा लेने पर मजबूर हो जाते हैं, पर सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती। ग्रामीण बताते हैं कि इस जोखिम भरे सफर के कारण वे हर पल अपनी जान मुट्ठी में लेकर चलते हैं।
घोड़ नदी पर एक स्थायी पुल बनाने की मांग चिंचणी और बोरी के निवासियों ने दशकों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने रखी है। लेकिन उन्हें अब तक केवल खोखले आधासन ही मिले हैं और धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है। स्थानीय नेताओं और प्रशासन की इस उदासीनता ने ग्रामवासियों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीण शिकायत करते हैं कि चुनाव के समय लोक प्रतिनिधि इस मुद्दे पर कार्रवाई करने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है।
सक्रिय रूप से जारी है ग्राम वासियों का प्रयास
75 वर्षों से पुल का निर्माण एक अधूरा सपना ही बना हुआ है, जिसे ग्रामीण राजनीतिक लापरवाही कर सबसे बड़ा उदाहरण मानते हैं। ग्रामवासियों ने कई लोक प्रतिनिधियों से संपर्क किया है, जिनमें पूर्व सांसद दिलीप गांधी और शिवाजी आढलराव पाटिल, पूर्व विधायक अशोक पवार और बबनराव पाचपुते शामिल हैं।
वहीं अहिल्यानगर दक्षिण लोकसभा क्षेत्र के सांसद नीलेश लंके ने ग्रामीणों को जल्द ही पुल के लिए निधि स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, ग्रामीणों ने श्रीगोंदा तहसील के विधायक विक्रम पाचपुते और शिरूर लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ अमोल कोल्हें से भी संपर्क करने का निर्णय लिया है, चिंचणी के पूर्व उपसरपंच अनिल पवार, विवाद मुक्ति समिति के अध्यक्ष कैलास पवार, शशिकांत गव्हाणे, सदीप पवार और सभाजी पवार जैसे स्थानीय नेता इस मामले में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं और प्राशासन पर दबाव बना रहे हैं। ग्रामीण अब केवल ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी जान जोखिम में डालना बंद हो सके।
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मानसून के दौरान संपर्क हो जाता है ठप
इस वर्ष की मानसून अवधि (मई से सितंबर) में हुई भारी बारिश के कारण घोड बांध में जलस्तर बहुत बढ़ गया था। परिणाम स्वरूप, लगातार पांच महीनों तक बांध से नदी में पानी छोड़ना पड़ा। पानी के कारण चिंचणी और बोरी के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह से ठप हो गया। इससे दोनों गांवों के निवासियों का स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बाजार से संपर्क टूट गया। ग्रामीण बताते हैं कि इस दौरान उन्हें अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा।
The people of chinchani bori have been waiting for permanant bridge for 75 years
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