Pune: जंगलों की आग केवल वन विभाग की समस्या नहीं, नागरिक भी निभाएं जिम्मेदारी

Maharashtra News: शिरूर वन परिक्षेत्र अधिकारी नीलकंठ गव्हाणे ने कहा है कि वनाग्नि रोकने के लिए नागरिकों की भागीदारी जरूरी, शिरूर वन अधिकारी ने जंगलों की आग पर नियंत्रण की अपील की।
Forest Fire
जंगल की आग (सौ. सोशल मीडिया )
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Forest Fire Awareness News: शिक्रापुर क्षेत्र में जंगलों में बार-बार लगने वाली आग को लेकर वन विभाग ने गंभीर चिंता जताई है। शिरूर वन परिक्षेत्र अधिकारी नीलकंठ गव्हाणे ने नागरिकों से अपील की है कि वे वनाग्नि रोकने के लिए केवल वन विभाग पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग से वन संपदा के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

गव्हाणे ने बताया कि गर्मी के मौसम में सूखी घास, पत्तियां और बढ़ता तापमान जंगलों में आग लगने की आशंका को कई गुना बढ़ा देता है। कई बार खेतों का कचरा जलाने, लापरवाही से फेंकी गई सिगरेट या माचिस, और कुछ मामलों में जानबूझकर लगाई गई आग भी भीषण वनाग्नि का कारण बन जाती है।

जैव विविधता और खेती पर असर

वनाग्नि का सीधा असर जंगलों में मौजूद दुर्लभ वनस्पतियों, पक्षियों और वन्यजीवों पर पड़ता है। इसके साथ ही आसपास के गांवों में जलस्तर घटने और खेती पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है, जिससे लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ता है।

सामूहिक प्रयास से ही समाधान

नीलकंठ गव्हाणे ने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। वन विभाग, ग्राम पंचायत, पुलिस और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय से ही वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

तुरंत सूचना देने की अपील

वन परिक्षेत्र अधिकारी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि कहीं भी जंगल में आग लगती हुई दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दें। समय पर सूचना मिलने से आग को फैलने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में हर नागरिक की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है और छोटी-सी सतर्कता भी जंगलों को बड़े नुकसान से बचा सकती है।

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