Pune कोर्ट में सावरकर मानहानि विवाद गरमाया, राहुल गांधी की याचिका पर Savarkar परिवार ने उठाए सवाल

Rahul Gandhi की नई याचिका पर सावरकर पक्ष ने आपत्ति जताई। वकील कोल्हटकर ने इसे “मड-स्लिंगिंग” बताते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा को ठेस पहुंचाती है। अगली सुनवाई में विस्तृत दलीलें होगी।
Rahul Gandhi Defamation Case Update
राहुल गांधी सावरकर मानहानि केस (सौ. फाइल फोटो )
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Rahul Gandhi News: स्वतंत्रवीर विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) के रिश्तेदार सात्यकी सावरकर द्वारा दायर मानहानि मामले में मंगलवार को एक नया मोड़ आ गया।

सावरकर पक्ष के वकील संग्राम कोल्हटकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से हाल ही में दाखिल की गई याचिका को “आपत्तिजनक” और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया है।

यह मामला राहुल गांधी के मार्च 2023 में लंदन में दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कथित रूप से ऐसा दावा किया था कि वीर सावरकर ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई से संबंधित घटना का उल्लेख किया था। सावरकर परिवार ने इस बयान को “तथ्यहीन, आधारहीन और मानहानिकारक” बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

सावरकर परिवार की शिकायत

राहुल गांधी ने 27 नवंबर को दाखिल अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मजिस्ट्रेट अदालत ने सावरकर परिवार की शिकायत पर “अनुचित जल्दबाजी” में समन जारी कर दिया। उनके वकील का कहना है कि शिकायतकर्ता ने पर्याप्त तथ्य प्रस्तुत किए बिना समन प्राप्त कर लिया, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

न्यायिक प्रणाली की मर्यादा को ठेस

इस पर जवाब देते हुए वकील संग्राम कोल्हटकर ने अदालत में दावा किया कि राहुल गांधी की यह याचिका “मड-स्लिंगिंग” यानी कीचड़ उछालने जैसी है। उन्होंने कहा कि याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा न केवल अनुचित है, बल्कि न्यायिक प्रणाली की मर्यादा को ठेस पहुंचाती है। कोल्हटकर के अनुसार, इस याचिका का उद्देश्य वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाना और विरोधी पक्ष को बदनाम करना है, न कि कानूनी प्रक्रिया में कोई सार्थक प्रगति करना।'

कोल्हटकर ने यह भी कहा कि शिकायत कानूनी प्रक्रिया के तहत दायर की गई है और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि राहुल गांधी की आपत्तियों को गंभीरता से परखा जाए, क्योंकि याचिका में लगाए गए आरोप न्यायालय की गरिमा को प्रभावित कर सकते हैं। मानहानि मामले पर अगली सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनेगी।

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