ZP और पंचायत समिति चुनाव से पहले पुरंदर में महायुति में फूट, त्रिकोणीय संग्राम

Purandar ZP Election News: राज्य में एकजुट दिखने वाली महायुति पुरंदर में बिखरती नजर आ रही है। जिप और पंचायत समिति चुनावों से पहले भाजपा, शिवसेना और राकांपा नेताओं में तीखा टकराव सामने आया है।
Pune News
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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BJP Shiv Sena Clash Purandar: महाराष्ट्र की राजनीति में 'महायुति' (भाजपा, शिवसेना-शिंदे और राष्ट्रवादी कांग्रेस-अजीत पवार) भले ही राज्य स्तर पर एक साथ हो, लेकिन पुणे के पुरंदर में समीकरण पूरी तरह से उलट गए हैं।

आगामी जिप और पंचायत समिति चुनावों ने यहां महायुति के घटक दलों के बीच एक ऐसे त्रिकोणीय संघर्ष को जन्म दिया है, जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है। पुरंदर में 'मित्र' ही अब एक-दूसरे के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे हैं।

पुरानी दुश्मनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही

डीसीएम अजीत पवार, शिवसेना (शिंदे) के विधायक विजय शिवतारे और हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक संजय जगताप। ये तीनों नेता अब महायुति का हिस्सा हैं, लेकिन पुरंदर की धरती पर इनका 'हाडवैर' (पुरानी दुश्मनी) खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

BJP और शिवसेना में पड़ी दरार

पुरंदर की राजनीति में नया मोड़ तब आया जब भाजपा ने पुणे मनपा की तर्ज पर यहां भी शिवसेना (शिंदे) के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया। संजय जगताप के भाजपा में आने से पार्टी की ताकत बढ़ी है और अब भाजपा यहां 'स्वबल' (अपने दम पर) चुनाव लड़ रही है।

जगताप, शिवतारे को मात देने के लिए भाजपा के संसाधनों का उपयोग कर रहे है, जो सीधे तौर पर महायुति की एकता पर सवाल खड़े करता है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिला परिषद चुनाव के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) ने हाथ मिलाने का फैसला किया है। इस रणनीतिक गठबंधन का सीधा उद्देश्य विजय शिवतारे और भाजपा (जगताप) के प्रभाव को कम करना है।

अजीत पवार बनाम विजय शिवतारेः बदला लेने की होड़

अजीत पवार और विजय शिवतारे के बीच का संघर्ष जगजाहिर है। 2019 के विधानसभा चुनाव में अजीत पवार - ने खुलेआम शिवतारे को हराने की चुनौती दी थी और संजय जगताप की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मध्यस्थता के बाद शिवतारे ने अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का प्रचार किया, लेकिन वे पुरंदर से उन्हें बढ़त दिलाने में नाकाम रहे। हाल ही में शिवतारे के प्रयासों से बनी फुरसुंगी-उरुली कांचन नगर परिषद पर भी अजीत पवार की राष्ट्रवादी ने कब्जा कर लिया, जिससे शिवतारे अब अपने अपमान का बदला लेने के लिए बेताब है।