
लाडकी बहिन योजना (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ladki Bahin News In Hindi: पुणे महानगर पालिका चुनाव की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले ‘लाड़ली बहन’ योजना की राशि खातों में जमा होने से शहर का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है।
14 जनवरी को जैसे ही जिले की 17 लाख 19 हजार महिलाओं के बैंक खातों में किस्त पहुंची, वैसे ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या यह आर्थिक मदद मतदान के पैटर्न को बदल देगी?
पुणे में महिला मतदाता केवल एक संख्या नहीं, बल्कि चुनावी नतीजों को पलटने वाली सबसे बड़ी ताकत हैं। चुनाव से ऐन पहले सीधे बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए पैसे पहुंचने को विपक्ष ने ‘चुनावी नैतिकता’ का उल्लंघन बताया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह मतदाताओं को सीधे तौर पर लुभाने की कोशिश है, जबकि सत्ताधारी दल इसे प्रशासन की नियमितः प्रक्रिया और महिलाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी बता रहे हैं।
पुणे मनपा चुनाव की स्थिति इस बार बेहद जटिल है। राज्य में एक साथ सरकार चलाने वाली भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) स्थानीय स्तर पर कई सीटों पर आमने-सामने हैं। ऐसे में ‘लाड़ली बहन’ योजना के श्रेय को लेकर भी खींचतान मची है।
भाजपा नेता मुरलीधर मोहोल और अन्य पदाधिकारी मेट्रो, सड़कों के जाल और केंद्र-राज्य की संयुक्त योजनाओं को अपनी उपलब्धि बता रहे है। उनका दावा है कि यह योजना भाजपा के सुशासन का प्रमाण है। सरकार का विकास मॉडल कारगर है।
उधर, राकांपा (अजीत पवार गुट) भी मतदाताओं को रिझाने में जुटी है। पार्टी महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अजीत पवार का जोर पानी की आपूर्ति, स्वच्छता और महिला स्वास्थ्य सेवाओं पर है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समर्थक लाड़ली योजना को सीधे पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की संवेदनशीलता से जोड़कर प्रचारित कर रहे है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में शिंदे ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया था।
ये भी पढे़ं :- Maharashtra: पुणे मनपा चुनाव में नया नियम, चारों समूहों में वोट डालना अनिवार्य






