

Mula Mutha Bhima River Pollution: पुणे जिले के शिरूर, दौंड और हवेली तालुका जलसंपदा के लिए समृद्ध माने जाते हैं, क्योंकि यहां मुला, मुठा और भीमा नदियों का भरपूर पानी उपलब्ध रहता है।
लेकिन हाल के वर्षों में तेज शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण इन नदियों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली मुला-मुठा नदी अब गंभीर प्रदूषण की मार झेल रही है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका क्षेत्रों में बढ़ती आबादी, झोपड़पट्टियों और उद्योगों से निकलने वाला सीवेज, प्लास्टिक और रासायनिक कचरा बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। इसके चलते नदी का पानी अत्यधिक दूषित हो गया है और कई स्थानों पर यह गटर जैसा दिखाई देने लगा है।
रांजणगांव सांडस के पास मुला-मुठा और भीमा नदियों का संगम होता है, जहां से यह प्रदूषित पानी उजनी डैम की ओर बढ़ता है। दौंड क्षेत्र के पारगांव सहित कई इलाकों में कोल्हापुर पद्धति के डैमों से लाखों एकड़ भूमि सिंचित होती है, लेकिन अब डैमों के पास पानी की सतह पर तेल और रसायनों की परत जमने लगी है।
नदियों में जमा गंदगी से जलचरों का जीवन संकट में पड़ गया है। दूषित पानी से खेती की उत्पादकता प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। साथ ही नदी किनारे बसे गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह प्रदूषण संकट जल, कृषि और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। नदियों की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट और औद्योगिक कचरे पर नियंत्रण जैसे उपाय जल्द लागू करना जरूरी बताया जा रहा है।