
पुणे न्यूज (सौ. डिजाइन फोटो )
Pune News In Hindi: शहर और जिले में एक के बाद एक तीन बड़े जमीन घोटाले सामने आने के बाद पुणे राजस्व विभाग पूरी तरह से सतर्क मोड में आ गया है।
जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने पदभार संभालते ही जमीन संबंधी मामलों की मंजूरी में बरते जाने वाले ‘शॉर्टकट’ पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। अब जिले में आने वाली जमीन संबंधी किसी भी फ़ाइल की गहनता से जांच की जा रही है, ताकि कोई भी अनियमितता छूटे नहीं।
पहले वरिष्ठ अधिकारी कनिष्ठ अधिकारियों पर विधास करके फ़ाइलों पर हस्ताक्षर कर देते थे, लेकिन अब यह प्रथा बंद कर दी गई है। जिलाधिकारी डूडी द्वारा शुरू की गई जांच के चलते ही पहले बोपोडी फिर ताथवडे के जमीन घोटाले के मामले उजागर हुए हैं।
जिलाधिकारी जितेंद्र इडी द्वारा शुरू की गई जांच ने अब जिले की सभी प्रकार की शासकीय (सरकारी) और इनामी भूमियों को अपने दायरे में ले लिया है। राजस्व विभाग ने जिले की सभी वर्ग-2, वर्ग-3 और अन्य इनामी व सरकारी जमीनों का व्यापक निरीक्षण शुरू कर दिया है।
जिला प्रशासन जमीनों का विशेष रूप से साइट विजिट स्थल निरीक्षण) कर कर जांच की जा रही है। जमीन का वर्तमान में क्या उपयोग हो रहा है, यह देखा जा रहा है। जमीन किसके कब्जे में है, इसकी भी जांच की जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण, यह जांच हो रही है कि जमीन के आवंटन में लगाई गई शतों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, जांच को और अधिक विस्तृत करने के लिए, जिलाधिकारी कार्यालय ने पंजीकरण एवं मुद्रांक शुल्क विभाग से आज तक हुई सभी इनामी जमीनों की खरीद-बिक्री से संबंधित विस्तृत जानकारी भी मांगी है। इस कदम से अवैध जमीन सौदों और सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है।
पुणे शहर के तत्कालीन तहसीलदार सूर्यकांत येवले को निलंबित कर दिया गया है। उनके कार्यकाल में निपटाए गए सभी फ़ाइलों की भी दोबारा जांच की जा रही है ताकि अन्य घोटालों का पता लगाया जा सके। वहीं जांच में दोषी पाए जाने वा ले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, घोटालों के कारण विभाग की छवि खराब हुई है और पारदर्शिता को फिर से स्थापित करने के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी था। अगले कुछ महीनों में सभी लंबित जमीन मामलों की गहनता से छानबीन की जाएगी।
यदि कोई अनियमित लेनदेन पाया जाता है, तो अधिकारी, कर्मचारी और संबंधित व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई होगी। भविष्य में ऐसे घोटाले न हों, इसके लिए राजस्व प्रणाली में ढांचागत बदलाव करने की योजना भी बनाई जा रही है।
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-पुणे से नवभारत लाइव के लिए समीर सय्यद की रिपोर्ट






