Pune में ट्रस्ट की जमीन बेचने का मामला गरमाया, 13 मंजिला इमारत और एनसीपी दफ्तर विवादों में

पुणे में DSTA Trust की जमीन को नियमों के खिलाफ बेचने का आरोप सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने दावा किया कि इसी जमीन पर एनसीपी (अजित पवार गुट) का शहर कार्यालय संचालित हो रहा है।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Pune News In Hindi: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जमीन घोटाले को लेकर हलचल तेज हो गई है। आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने दावा किया है कि वर्ष 1936 में स्थापित्त डेक्कन शुगर टेक्नोलॉजी एसोसिएशन (डीएसटीए) की जमीन से जुड़ा एक गंभीर और कथित रूप से गैरकानूनी लेन-देन सामने आया है।

कुंभार ने आरोप लगाया कि इस जमीन पर वर्तमान में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत गुट) का पुणे शहर कार्यालय संचालित हो रहा है।

नियमों को ताक पर रख बेची जमीन

सोमवार को पुणे में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में विजय कुंभार ने आरोप लगाया कि डीएसटीए को धर्मादाय आयुक्त द्वारा अपनी आधी जमीन 60 वर्षों के लिए केवल लीज पर देने की अनुमति दी गई थी। इसके चावजूद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखते हुए इस जमीन को कल्पवृक्ष प्लांटेशन नामक कंपनी को बेच दिया।

कुंभार के अनुसार, इसी जमीन पर अब 13 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग बनाई गई है। इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर में एनसीपी का पुणे शहर कार्यालय है, जबकि ऊपरी मंजिलें कमर्शियल दरों पर निजी तौर पर बेची गई हैं। कुंभार के मुताबिक यह मामला ट्रस्ट की संपत्ति के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण है।

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साहिल प्रधान की भूमिका पर संदेह

विजय कुंभार ने इस प्रकरण में साहिल प्रधान की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि DSTA ने जमीन के विकास के लिए साहिल प्रधान को पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी। यही साहिल प्रधान कथित मुंढवा जमीन घोटाले में अमीडिया कंपनी और शीतल तेजवानी के बीच हुए समझौते में गवाह रह चुका है।

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