Pune-Chhatrapati Sambhajinagar एक्सप्रेस वे का खाका जारी, तीन चरणों में होगा विकास

Pune से छत्रपति संभाजीनगर तक प्रस्तावित एक्सप्रेस वे परियोजना तीन चरणों में विकसित होगी। पुणे-शिरूर एलिवेटेड कॉरिडोर से यातायात सुगमता और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
Pune- Chhatrapati Sambhajinagar Expressway
पुणे-संभाजीनगर एक्सप्रेसवे (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: महाराष्ट्र स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSIDC) ने पुणे से छत्रपति संभाजी नगर तक प्रस्तावित एक्सप्रेस वे परियोजना का विस्तृत खाका जारी कर दिया है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य की एक बड़ी आधारभूत संरचना योजना माना जा रहा है, जो पुणे और मराठवाड़ा क्षेत्र के बीच तेज, सुरक्षित और निर्वाध संपर्क सुनिश्चित करेगी।

एमएसआईडीसी द्वारा जारी की जानकारी के अनुसार यह परियोजना तीन प्रमुख चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में पुणे-शिरूर एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण होना तय हुआ है। दूसरे चरण में शिरूर से छत्रपति संभाजी नगर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का विकास होगा और तीसरे चरण में में पुणे-शिरूर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा।

तीनों में से पहला चरण वर्तमान में सबसे अधिक सक्रिय है। इस चरण के लिए हाल ही में वित्तीय टेंडर ओपन की गई थी, जिनमें एक कंपनी ने सबसे कम दर की बोली लगाकर L1 बिडर का स्थान प्राप्त किया है। अब परियोजना के अनुबंध की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।

विकास को नई दिशा

अधिकारियों का कहना है कि अनुबंध पर हस्ताक्षर के बाद निर्माण कार्य शीघ्र ही शुरू होने की संभावना है। पुणे-शिरूर एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्देश्य मौजूदा ट्रैफिक दबाव को कम करना और औद्योगिक बेल्ट तक सुगम यातायात सुनिश्चित करना है। वर्तमान में पुणे से शिरूर मार्ग पर भारी वाहनों और औद्योगिक यातायात के कारण जाम की स्थिति बनी रहती है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से यात्रा का समय घटेगा और यातायात का दबाव कम होगा, वहीं, शिरूर से छ। संभाजी नगर तक बनने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे से राज्य के मध्य भाग में नई औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्रसहन मिलेगा, इस मार्ग के आसपास औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक हब और वेयरहाउसिंग जोन विकसित करने की भी योजना है, जिससे मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ा जा सकेगा।

प्राथमिकता में परियोजना

राज्य सरकार ने इस परियोजना को अपनी प्राथमिक योजनाओं में शामिल किया है। सरकार का मानना है कि यह एक्सप्रेस वे पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के बीच औद्योगिक एकीकरण को गति देगा और क्षेत्रीय संतुलित विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

परियोजना पूरी होने पर यह एक्सप्रेस वे पुणे-मुंबई एक्सप्रेस वे और नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग की तरह ही राज्य के परिवहन नेटवर्क को एक नई दिशा देगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इस परियोजना के पूरे होने के बाद न केवल यातायात सुगमता होगा, बल्कि राज्य के लॉजिस्टिक सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी।

गेम चेंजर साबित होगी

66 परियोजना गेम चेंजर साबित होने वाली है, इसके जरिये प। महाराष्ट्र से मराठवाड़ा और विदर्भ कनेक्ट होगा। देश में पहली बार 35 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा। पुराना और नया मिलाकर कुल 10 लेन का एक्सप्रेस वे होगा, यह परियोजना ऐसी जगहों से होकर गुजरने वाली है, जो कम विकसित हुए है। परियोजना के पूरा होने पर ये इलाके भी विकसित हो जाएंगे। इससे ट्रैफिक की समस्या तो हल होगी ही, इसके साथ-साथ औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। - बृजेश दीक्षित, एमडी, एमआईडीसीएल

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