
पीएमपीएल (सौ. सोशल मीडिया )
PMPML Recruitment Promotion Controversy: पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (पीएमपीएमएल) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला इतना चौंकाने वाला है कि सुनकर प्रशासनिक व्यवस्था पर से भरोसा डगमगाने लगा है।
आरोप है कि पीएमपीएमएल में नियमों को ताक पर रखकर क्लीनर पद पर कार्यरत दो कर्मचारियों को सीधे सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैसे तकनीकी और जिम्मेदार पद पर पदोन्नत कर दिया गया। चतुर्थ श्रेणी से उच्च तकनीकी पद तक की यह ‘जादुई छलांग’ अब एक बड़े भर्ती घोटाले के रूप में सामने आ रही है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाया है। कांग्रेस शहराध्यक्ष अरविंद शिंदे और पूर्व विरोधी पक्षनेता उज्ज्वल केसकर ने आरोप लगाया कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर पद के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी अनुभव और सेवा वरिष्ठता को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
उनका दावा है कि यह सब प्रबंध निदेशक स्तर पर हुए कथित आर्थिक लेन-देन का नतीजा है। नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पीएमपीएमएल की डिजिटल और तकनीकी सुरक्षा से भी खिलवाड़ है।
आरोप यहीं खत्म नहीं होते। कांग्रेस का कहना है कि वर्ष 2023 के भर्ती ढांचे में 100 पदों के विज्ञापन के बावजूद 200 जूनियर क्लर्क के नियुक्ति आदेश जारी किए गए। सबसे गंभीर बात यह है कि यह सारी प्रक्रिया पुणे महानगर पालिका चुनाव की आचार संहिता लागू होने के दौरान की गई। चुनावी आचार संहिता के समय इस तरह की नियुक्तियां सीधे तौर पर चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन मानी जाती हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व नगरसेवक प्रशांत बधे और सुहास कुलकर्णी ने महानगर पालिका आयुक्त नवल किशोर राम को ज्ञापन सौंपकर सभी विवादित आदेश तत्काल स्थगित करने की मांग की है।
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कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा जांच समिति सिर्फ दिखावा है। अरविंद शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि जब चोर ही चौकीदार हों, तो न्याय की उम्मीद बेमानी है। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों के वितीय अधिकार छीने जाएं।






