आचार संहिता से पहले ₹250 करोड़ के फैसले, पिंपरी-चिंचवड़ मनपा पर सवाल

Pune News: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा में आचार संहिता लागू होने से पहले ₹250 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी देने पर विवाद गहराया है, जिसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग में की गई है।
PCMC Fake Subsidiary Notice Scam Payment Controversy
पिपरी-चिंचवड मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा की आगामी आम चुनाव आचार संहिता लागू होने के महज कुछ घंटे पहले लिए गए प्रशासनिक फैसलों ने शहर में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा दिया है।

आरोप है कि मनपा के आयुक्त एवं प्रशासक ने आचार संहिता लगने के ठीक पहले 250 करोड़ रुपये के विकास कार्यों और निविदाओं को आनन-फानन में मंजूरी दे दी। इस मामले में अब राज्य निर्वाचन आयोग के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें अधिकारों के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया गया है।

सूचना का अधिकार कार्यकर्ता सूर्यकांत सरवदे ने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त को एक लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 15 दिसंबर को शाम 4 बजे निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस तय थी, जिसकी जानकारी प्रशासन को पहले से थी।

इसके बावजूद उसी दिन सुबह 10 बजे प्रशासक ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और 150 से अधिक प्रस्तावों को मंजूरी दे दी इन प्रस्तावों में 154 करोड़ रुपये के सुरक्षा गार्ड आपूर्ति के ठेके सहित 250 करोड़ों रुपये के अन्य कार्य शामिल थे।

विवाद का एक मुख्य केंद्र यह है कि जब 16 जनवरी के बाद नई निर्वाचित सभा कार्यभार संभालने वाली है, तो प्रशासक ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई? शिकायतकर्ता का तर्क है कि जो काम आने वाली निर्वाचित सरकार के अधिकार क्षेत्र में होने चाहिए थे, उन्हें प्रशासक ने 5 वर्षों के लंबे अनुबंधों के साथ अभी क्यों आवंटित किया। इस फैसले को जनहित के बजाय ठेकेदारों के हित से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे प्रशासन की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

एक सामान्य कार्यकर्ता द्वारा यदि आचार संहिता का उल्लंघन किया जाता है, तो तुरंत उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है। लेकिन इस तरह से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लोकतंत्र की पवित्रता को खतरे में डालने का काम किया जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग के पास शिकायत दर्ज कराई गई है और उनसे निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा है।

- सूर्यकांत सरवदे, सूचना का अधिकार कार्यकर्ता

HC में दायर करेंगे याचिका

  • शिकायत में मांग की गई है कि 15 दिसंबर की बैठक में स्वीकृत 250 करोड़ रुपये के सभी प्रस्तावों को तुरंत रद्द किया जाए।
  • आरटीआई कार्यकर्ता सूर्यकांत सरवदे ने प्रशासक की भूमिका की सेवानिवृत्त न्यायाधीश से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
  • उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्वाचन आयोग दोषियों पर कार्रवाई नहीं करता, तो ये उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे।
  • आरोप है कि इन कार्यों को मंजूरी देते समय नियमों की अनदेखी की गई है, जिसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। अब सबकी निगाहे राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले पर टिकी है।
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