पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका भवन फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Pimpri Chichwad Metro Road Issue: पिंपरी-चिंचवड़ शहर में मेट्रो विस्तार परियोजना और नागरिक सुविधाओं को लेकर स्थायी समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। पिंपरी से निगड़ी रूट पर महामेट्रो द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य के कारण सर्विस रोड की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है।
सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे और फैली हुई कंक्रीट के कारण वाहन चालकों तथा पैदल यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समिति ने पुणे मेट्रो को दिए जाने वाले फंड पर तब तक रोक लगा दी है जब तक कि सड़कों की उचित मरम्मत नहीं कर दी जाती है।
वर्तमान में पिंपरी से निगड़ी के भक्ति-शक्ति चौक तक लगभग 4.413 किलोमीटर लंबे मार्ग का काम तेजी से चल रहा है और इसका करीब 55 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है।
इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 960 करोड़ 18 लाख रुपये है, जिसमें से महानगरपालिका को अपने हिस्से के 146 करोड़ 91 लाख रुपये देने हैं। अब तक मनपा द्वारा 49 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, और आगामी 50 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा गया था। लेकिन स्थायी समिति के अध्यक्ष अभिषेक बारणे ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की सुरक्षा और सुगम यातायात प्राथमिकता है, इसलिए महामेट्रो को पहले सड़कों की मरम्मत करनी होगी, उसके बाद ही भुगतान संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी।
मेट्रो फंड के अलावा स्थायी समिति की बैठक में अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णयों पर भी मुहर लगाई गई। चिखली स्थित जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ सीबीएसई स्कूल के विकास के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा आवंटित एक करोड़ रुपये की राशि, जो खर्च नहीं हो पाई थी, उसे स्कूल के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं, स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत ईआरपी सिस्टम के लिए वर्चुअल मशीन उपलब्ध कराने से संबंधित कार्यों पर होने वाले 2।20 करोड़ रुपये के खर्च को भी स्वीकृत किया गया।
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यह प्रोजेक्ट अब आधिकारिक रूप से महानगरपालिका के आईटी विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचे के विकास को गति देते हुए रावेत की इंद्रप्रभा सोसायटी के पास सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे महापारेषण कंपनी के दो ऊंचे बिजली टावरों को हटाने का निर्णय लिया गया है, जिस पर लगभग 21।55 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन निर्णयों से स्पष्ट है कि प्रशासन शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।