'तुम अकेली नहीं हो, हम साथ हैं', बुरे वक्त में नीलम गोरहे के साथ खड़े थे बालासाहेब, सुनाया अनकहा किस्सा

Neelam Gorhe on Balasaheb Thackeray Birth Centenary: बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर नीलम गोरहे ने साझा किए भावुक किस्से। बताया- कैसे बालासाहेब ने पिता के निधन के बाद बढ़ाया था ढांढस।
Neelam Gorhe pays tribute to Balasaheb Thackeray on his birth centenary, sharing personal anecdotes and his vision of 80% social work and 20% politics.
नीलम गोरहे और बालासाहेब ठाकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Balasaheb Thackeray Birth Centenary: बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे को पिछले 28 वर्षों से जानती थीं और उनके नेतृत्व से उन्हें लगातार सीखने को मिला।

नीलम गोरहे ने आईएएनएस से कहा, "बालासाहेब ठाकरे एक ऊंचे कद के नेता थे। उन्होंने हिंदुत्व के माध्यम से राष्ट्रवाद की सोच को समझाया और अपनी विचारधारा के केंद्र में महाराष्ट्र, मराठी मानुष और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को रखा।"

नीलम गोरहे ने साझा किए अनुभव

उन्होंने बताया कि बालासाहेब का मानना था कि जीवन का 80 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए और केवल 20 प्रतिशत राजनीति के लिए होना चाहिए। नीलम गोरहे ने यह भी कहा कि बालासाहेब ठाकरे को दुनिया भर में उनके कार्टूनों के लिए सराहा जाता था। इसके साथ ही उन्हें क्रिकेट, कला, साहित्य और संगीत में गहरी रुचि थी, जो उनकी बहुआयामी सोच को दर्शाता है।

नीलम गोरहे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मुझे लगता है कि अगर बालासाहेब आज जीवित होते, तो वे भारत और महाराष्ट्र की राजनीति को और भी ऊंचे स्तर पर ले जाते। बालासाहेब न केवल एक राजनेता थे, बल्कि समाज को दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी थे।"

बुरे वक्त पर बालासाहेब ने किया था फोन

उन्होंने एक छोटी-सी याद भी सुनाई। नीलम गोरहे ने कहा कि एक बार जब बालासाहेब पुणे आए, तो उन्होंने उनसे शाम को सम्मान समारोह करने की अनुमति मांगी। बालासाहेब ने पहले उनसे पूछा कि वे ऐसा क्यों करना चाहती हैं और उनकी योजना क्या है, लेकिन बाद में सहमति दे दी।

उन्होंने कहा कि ऐसे कई छोटे-छोटे पल थे जो यह दिखाते हैं कि बालासाहेब कितने सतर्क और ध्यान देने वाले व्यक्ति थे। वह आशीर्वाद भी देते थे और अगर कुछ गलत होता, तो उसे सुधारने की सलाह भी देते थे।

नीलम गोरहे ने बताया कि उनके पिता का निधन वर्ष 2011 में हो गया था। उन्होंने कहा, "मेरे पिता चाहते थे कि मैं शिवसेना के साथ जुड़ाव रखूं। जब उनके जाने के बाद बालासाहेब को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने मुझे फोन कर कहा, 'देखो, हम सब तुम्हारे साथ हैं। यह मत समझो कि तुम अकेली हो।'"

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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