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राज्य चुनाव आयोग ने दायर किया हलफनामा, ईवीएम के साथ VVPAT जोड़ने का अनिवार्य प्रावधान नहीं
- Written By: आंचल लोखंडे
Bombay High Court: राज्य चुनाव आयोग के डेप्युटी सेक्रेटरी की ओर से हलफनामा दायर किया गया। जिसमें स्थानिय निकाय कानूनों का हवाला देते हुए ईवीएम के साथ वीवीपैट को जोड़ने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं।

राज्य चुनाव आयोग ने दायर किया हलफनामा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nagpur News: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में VVPAT को अनिवार्य करने या बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर इंडियन नेशनल कांग्रेस के पदाधिकारी प्रफुल्ल गुड्धे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के अनुसार राज्य चुनाव आयोग के डेप्युटी सेक्रेटरी की ओर से हलफनामा दायर किया गया। जिसमें स्थानिय निकाय कानूनों का हवाला देते हुए ईवीएम के साथ वीवीपैट को जोड़ने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं होने की जानकारी उजागर की गई।
साथ ही राज्य चुनाव आयोग को प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों में किसी भी तरह के सुधार या परिवर्तन के आदेश देना एक तरह से संवैधानिक अधिकारों के दायरें का उल्लंघन होने के संकेत भी दिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधि। निहालसिंह राठोड और अधि। पवन डहाट ने पैरवी की। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधि। निहालसिंह राठोड ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीनों का उपयोग न करने के महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग आदेश देने का अनुरोध भी किया।
दखलअंदाजी से पहले भी इंकार
राज्य चुनाव आयोग के डेप्युटी सेक्रेटरी की ओर से दायर हलफनामा में याचिका को निरस्त करने की मांग की गई। हलफनामा में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कानूनों में बदलाव करने का अधिकार है। ऐसे में उन्हें प्रतिवादी नहीं बनाए जाने के कारण भी याचिका खारिज की जानी चाहिए। वीवीपैट को लेकर इसके पूर्व भी मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
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जिसमें हाई कोर्ट ने दखलअंदाजी से इंकार करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था। वर्तमान याचिका केवल संभावनाओं के आधार पर दायर की गई है। यहां तक कि तर्कों को पुख्ता करने के लिए किसी तरह के दस्तावेजी सबूत नहीं दिए गए हैं। चुनाव आयोग को स्थानिय निकायों के निष्पक्ष चुनाव कराने के सम्पूर्ण अधिकार है। वर्ष 1989 में रिप्रेजेन्टेशन आफ पीपल्स एक्ट 1951 में संशोधन किया गया था। जिसके अनुसार संसदीय और विधानसभाओं के चुनावों में ईवीएम का उपयोग शुरू किया गया था।
ईवीएम नियमों की कमी
याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि राज्य विधानमंडल ने स्थानीय निकायों (जैसे जिला परिषद, पंचायत समिति, नगर परिषद और निगम) के लिए चुनाव कराने हेतु ईवीएम के उपयोग की प्रक्रिया और पद्धति निर्धारित करने वाले नियम अभी तक नहीं बनाए हैं। चूंकि चुनाव संचालन नियम मतपत्रों (बैलेट पेपर) के माध्यम से चुनाव कराने की विस्तृत प्रक्रिया प्रदान करते हैं, इसलिए एसईसी द्वारा ईवीएम का उपयोग करना विधायकों की इच्छा के विपरीत है। याचिका में कहा गया है कि यदि राज्य चुनाव आयोग VVPAT मशीनों की कमी का सामना कर रहा है, जो अब ईवीएम का एक अभिन्न अंग है, तो एकमात्र विकल्प बैलेट पेपर को अपनाना चाहिए, जो संवैधानिक रूप से और व्यावहारिक रूप से लागू करने योग्य है।
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हर मशीन से जुड़ी हो वीवीपीएटी
याचिकाकर्ता ने राज्य चुनाव आयोग को संबंधित विधियों के तहत बनाए गए चुनाव संचालन नियमों के अनुसार मतपत्रों के माध्यम से आगामी स्थानीय निकाय चुनाव आयोजित करने का निर्देश देने, राज्य चुनाव आयोग के VVPAT मशीनों को तैनात न करने के निर्णय को रद्द किया जाए और आयोग को आगामी सभी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए प्रत्येक ईवीएम मशीन के साथ VVPAT मशीनें तैनात करने, मामले की अंतिम सुनवाई और निपटारे तक VVPAT के बिना ईवीएम का उपयोग करने से रोकने के आदेश देने का अनुरोध भी किया।
No mandatory provision for linking vvpat with evm
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