पुणे जिला परिषद की बैठक (pic credit; social media)
Maharashtra News: पुणे की नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों को गति देने के लिए प्रशासन ने ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री और पुणे के सांसद मुरलीधर मोहोल ने कहा कि अब केवल बड़ी नदियों पर नहीं, बल्कि उनमें मिलकर प्रदूषण फैलाने वाली छोटी नदियों, नालों और नालियों के पानी पर भी वैज्ञानिक प्रक्रिया लागू की जाएगी। इसके लिए पुणे महानगरपालिका, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका, पीएमआरडीए और जिला परिषद की संयुक्त बैठक जल्द होगी।
जिलाधिकारी कार्यालय में हुई “जिला विकास समन्वय व निगरानी समिति (दिशा)” की बैठक में मोहोल ने कहा कि पुणे जिला औद्योगिक, शैक्षणिक और आईटी सेक्टर में देशभर में अग्रणी है, लेकिन जल प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन चुका है। ग्रामीण और शहरी भागों से निकलने वाली नालियों और औद्योगिक कचरे का पानी सीधे नदियों में जा रहा है, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई परियोजनाओं पर काम कर रही हैं, लेकिन केवल प्रमुख नदियों पर ध्यान देने से समस्या हल नहीं होगी। छोटे-छोटे जलस्रोतों को भी वैज्ञानिक ढंग से शुद्ध करना जरूरी है।
बैठक में नदी स्वच्छता के साथ-साथ स्थायी कचरा प्रबंधन, हरित ऊर्जा, ग्रामीण विकास, शहरी सुविधाएं और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की गई। पुणे जिला परिषद जल्द ही कचरा प्रबंधन और मलजल निपटान के नए प्रोजेक्ट शुरू करेगी, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
यातायात व्यवस्था पर चर्चा करते हुए मोहोल ने बताया कि पुणे मेट्रो शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभा रही है। जुलाई में जहां 1.92 लाख यात्रियों ने मेट्रो का उपयोग किया, वहीं अगस्त में यह संख्या बढ़कर 2.13 लाख हो गई।
बैठक में हवाई अड्डे के पुराने टर्मिनल के नवीनीकरण और मराठा आरक्षण मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मोहोल ने कहा कि मराठा समाज को आरक्षण दिलाने की दिशा में भाजपा सरकार ने सबसे पहले ठोस कदम उठाए थे।