सांस लेना हुआ दूभर, पुणे के खराडी निवासियों ने मलबे के ढेर से निकलते जहरीले धुंए को लेकर जताई चिंता
Kharadi Pune Toxic Smoke News: पुणे के खराडी में PMC के आरक्षित भूखंड पर पड़े मलबे से निकल रहे जहरीले धुएं ने निवासियों का दम घोंट दिया है। AQI 136 के पार पहुंच गया है।
- Written By: अनिल सिंह
Kharadi Pune Toxic Smoke News (फोटो क्रेडिट-X)
PMC Debris Dumping Problem Kharadi: पुणे के खराडी इलाके में रहने वाले हजारों निवासियों के लिए सांस लेना दूभर हो गया है। पुणे नगर निगम (PMC) द्वारा सार्वजनिक उद्यान (Public Garden) के लिए आरक्षित एक भूखंड पर पिछले एक साल से डाले जा रहे मलबे के ढेर ने अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। निवासियों का आरोप है कि मलबे के कारण जमीन का स्तर 15 फीट तक ऊपर उठ गया है और पिछले एक महीने से इस ढेर से निकल रहे जहरीले धुएं और दुर्गंध ने उनका जीना मुहाल कर दिया है।
खराडी आवासीय कल्याण समिति (Kharadi Residential Welfare) के अनुसार, लगभग 20 दिन पहले मलबे के इस ढेर में भीषण आग लग गई थी। दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन मलबे के भीतर दबी गर्मी के कारण अब भी लगातार धुआं निकल रहा है। यह जहरीला धुआं आसपास की बड़ी रिहायशी सोसाइटियों और एक स्कूल के परिसर में घुस रहा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पहुंचा 136 के पार
खराडी आवासीय कल्याण के संयुक्त सचिव अक्षय पूरे ने बताया कि जहरीली गैसों के कारण क्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 136 तक पहुंच चुका है, जो ‘संवेदनशील समूहों के लिए अस्वास्थ्यकर’ श्रेणी में आता है। पिछले 20 दिनों से निवासी पीएमसी अधिकारियों, स्थानीय पार्षदों और पुलिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। निवासियों की मांग है कि इस मलबे को तुरंत हटाया जाए और भूखंड को उसके मूल स्वरूप यानी बगीचे के रूप में बहाल किया जाए।
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‘बगीचे के नाम पर हरियाली का विनाश’
फ्री प्रेस जर्नल की खबर के मुताबिक स्थानीय निवासी प्रशांत दास और प्रभा कार्पे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक साल पहले तक यह एक एकड़ जमीन पेड़ों और हरियाली से भरी थी। धीरे-धीरे यहां बड़े ट्रकों द्वारा मलबा डाला जाने लगा और देखते ही देखते प्राकृतिक संपदा को 15 फीट मलबे के नीचे दबा दिया गया। निवासियों का दावा है कि मलबे के ऊपर अवैध रूप से निर्माण कार्य की भी कोशिशें देखी गई हैं। मार्वल सिट्रीन, गुलमोहर प्रिविलेज और फॉरेस्ट एज जैसी सोसाइटियों के लोग अब इस जहरीली हवा के कारण गंभीर बीमारियों के डर में जी रहे हैं।
नगर निगम का दावा और निवासियों की चेतावनी
इस पूरे विवाद पर सहायक नगर आयुक्त संजय पोल ने सफाई देते हुए कहा कि आग बुझा दी गई है और निकलने वाला धुआं दरअसल गर्म मलबे पर पानी पड़ने से बनने वाली वाष्प है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां कोई निजी निर्माण नहीं हो रहा है, बल्कि जमीन को समतल कर बगीचा बनाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, निवासी इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं। कल्याण समिति की अध्यक्ष प्रभा कार्पे ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मलबा पूरी तरह नहीं हटाया गया, तो खराडी के नागरिक सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
