
देवेंद्र फडणवीस, शरद पवार ने जयंत नारलीकर को दी श्रद्धांजलि। (सौजन्य: सोशल मीडिया)
पुणे: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राकांपा (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को प्रख्यात खगोल वैज्ञानिक डॉ. जयंत विष्णु नारलीकर के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक अनुसंधानकर्ता और एक लेखक के रूप में नारलीकर के योगदान को याद किया। पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. नारलीकर का 87 की उम्र में सोमवार देर रात नींद में ही निधन हो गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि वैज्ञानिक का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। फडणवीस ने लिखा कि वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक और विज्ञान लेखक, महाराष्ट्र भूषण जयंत नारलीकर के निधन की खबर बहुत दुखद है। उन्होंने वैज्ञानिक विषयों पर साहित्य रचकर विज्ञान के प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि खगोल भौतिकी के क्षेत्र में अनुसंधान करने के अलावा, नारलीकर ने जटिल विषयों को आम पाठकों तक बहुत सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि मराठी में उनके लेखन से पाठकों को आनंद मिलता था। फडणवीस ने कहा कि हमने एक महान वैज्ञानिक और उतने ही महान लेखक को खो दिया है। मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
ज्येष्ठ खगोल शास्त्रज्ञ आणि विज्ञान लेखक, महाराष्ट्र भूषण जयंत नारळीकर यांच्या निधनाचे वृत्त अतिशय दुःखद आहे.
वैज्ञानिक विषयात साहित्य निर्मिती करून विज्ञानाचा प्रसार करण्यात त्याची अत्यंत मोलाची भूमिका राहिली. त्यासाठी जागतिक पातळीवर त्यांना पुरस्कारांनी गौरवण्यात आले. खगोल… pic.twitter.com/1Tws7nMaVR — Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) May 20, 2025
तो वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान में महत्वपुर्ण योगदान देने वाले महाराष्ट्र के वैज्ञानिकों में नारलीकर को हमेशा सम्मान और आदर के साथ याद किया जाएगा। राकांपा (एसपी) अध्यक्ष पवार ने याद दिलाते हुए कहा कि उनका ‘हॉयल-नारलीकर’ सिद्धांत वैज्ञानिक जगत में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे उन्होंने प्रसिद्ध ब्रिटिश वैज्ञानिक सर फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर प्रतिपादित किया था।
पवार ने कहा कि उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च यानी टीआईएफआर और इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स यानी आईयूसीएए में अपने कार्यकाल के दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान को एक महत्वपूर्ण दिशा दी। पवार ने कहा कि नारलीकर के लेख और व्याख्यान विज्ञान के प्रसार के लिए अमूल्य हैं, उन्होंने जोर देते हुए बताया कि नारलीकर ने वैज्ञानिक सोच की वकालत की और अंधविश्वास का विरोध किया।
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी नारलीकर को श्रद्धांजली देते हुए कहा कि ज्ञान और विज्ञान के आकाश में चमकता एक सितारा टूट गया। उन्होंने बताया कि नारलीकर ने अपना जीवन युवा पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच, तर्कसंगत सोच और विज्ञान के सिद्धांतों को प्रतिस्थापित करने के लिए समर्पित कर दिया, उन्होंने विज्ञान के रहस्यों को सरल और समझने योग्य तरीके से समझाया।
अजित पवार ने आगे कहा कि डॉ. नारलीकर वैश्विक स्तर के वैज्ञानिक और व्यावहारिक विचारक थे, जिन्होंने तर्कवाद का समर्थन किया है। भौतिकी और खगोल विज्ञान में ज्ञान के प्रसार के लिए उन्होंने जिस संस्था ‘आईयूसीएए’ की स्थापना की, वह भारत की वैज्ञानिक विरासत की आधारशिला बन गई है। उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास पर उनके अनुसंधान ने उन्हें दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय के बीच सम्मान दिलाया। अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वकालत करने और अंधविश्वास को चुनौती देने वाले उनके भाषण को हमेशा याद किया जाएगा।”
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी दिवंगत वैज्ञानिक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके निधन से विज्ञान की दुनिया में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। शिंदे ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र के इस बेटे ने खगोल भौतिकी के क्षेत्र में अपनी वो पहचान बनाई है, जो राज्य के लिए बहुत गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने कई मौकों पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े मामलों में राज्य सरकार का मार्गदर्शन किया। शिंदे ने आगे कहा, ‘‘पुणे में आईयूसीएए की स्थापना करके उन्होंने राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक मजबूत नींव रखी। उनके मार्गदर्शन में महाराष्ट्र ही नहीं तो देश ने विज्ञान के क्षेत्रों में अग्रणी स्थान हासिल किया है।”
(एजेंसी इनपुट के साथ)






