पुणे निकाय चुनाव से पहले BJP की बड़ी चाल, अजित पवार गुट पर सीधा वार

Pune News: भाजपा ने पुणे निकाय चुनाव को लेकर अजित पवार गुट को निशाना बनाने की रणनीति बनाई है। BJP 104 सीटों पर दावा ठोकते हुए कई बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने की तैयारी की है।
AJIT PAWAR
अजित पवार (pic credit; socila media)
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Pune Municipal Elections 2025: पुणे महानगरपालिका की सत्ता में दोबारा काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने निकाय चुनाव से पहले ही मोर्चेबंदी शुरू कर दी है। इस बार भाजपा ने सत्ता में साझीदार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) को ही निशाने पर लेने का प्लान बनाया है।

दरअसल, बीते कुछ हफ्तों में भाजपा ने महाविकास आघाड़ी से कई दिग्गज नेताओं को तोड़कर अपने खेमे में शामिल किया है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि आने वाले दिनों में और बड़े चेहरे भाजपा में प्रवेश करने वाले हैं। यह कदम अजित पवार गुट के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

महापालिका चुनाव की प्रक्रिया पिछले चार वर्षों से अटकी हुई थी लेकिन अब दिसंबर-जनवरी में चुनाव होने की संभावना है। इसी को देखते हुए सभी राजनीतिक दल तैयारी में जुट गए हैं। सत्ताधारी महायुती गठबंधन यानी भाजपा, शिवसेना और अजीत पवार गुट साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे या अलग-अलग, इस पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है।

पिछली बार 2017 में भाजपा ने 97 सीटें जीतकर पुणे महापालिका में एकतरफा जीत दर्ज की थी। बाद में संख्या बढ़कर 104 तक पहुंच गई। इस बार पार्टी ने 125 सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए भाजपा ने विपक्षी खेमे के प्रभावशाली नेताओं और टिकट की उम्मीद रखने वाले चेहरों को अपने पाले में लाने की रणनीति बनाई है।

पार्टी का खास फोकस वडगांव शेरी और पर्वती विधानसभा क्षेत्रों पर है। कोथरूड को भाजपा का गढ़ माना जाता है लेकिन पिछले चुनाव में यहां विरोधियों ने चार सीटें जीत ली थीं। इस बार भाजपा ने इन सभी सीटों पर कब्जा जमाने की ठानी है। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रवादी कांग्रेस के एक बड़े नेता के बेटे का भाजपा में प्रवेश लगभग तय माना जा रहा है।

हालांकि, इस रणनीति से भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी बढ़ी है। वडगांव शेरी में चर्चा है कि एनसीपी (शरद पवार गुट) विधायक आपुसाहेब पठारे के बेटे सुरेंद्र पठारे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इस पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए पत्र लिखा है। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को ही टिकट मिलना चाहिए, बाहरी नेताओं को नहीं।

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे शहर में सियासी घमासान तेज हो रहा है। भाजपा के भीतर भी असंतोष उभरने लगा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का साफ संदेश है कि पार्टी अगर सत्ता वापसी चाहती है तो टिकट बांटने में निष्ठावान कार्यकर्ताओं को ही प्राथमिकता दी जाए।

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