Sunetra Pawar Baramati Candidate NCP (फोटो क्रेडिट-X)
Sunetra Pawar Baramati Candidate NCP: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के बाद अब बारामती और राहुरी विधानसभा सीटों पर उपचुनावों की आहट तेज हो गई है। राज्य के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन और राहुरी से भाजपा विधायक शिवाजीराव कर्डिले के देहांत के बाद ये सीटें रिक्त हुई हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मार्च 2026 के दूसरे या तीसरे सप्ताह में इन सीटों के लिए आधिकारिक घोषणा किए जाने की प्रबल संभावना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन उपचुनावों को पांच राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी) के आगामी विधानसभा चुनावों के साथ ही संपन्न कराया जा सकता है।
बारामती सीट पर अजित पवार की विरासत को आगे ले जाने के लिए उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम लगभग तय माना जा रहा है। चूंकि वे वर्तमान में राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं, इसलिए संवैधानिक नियमों के तहत उनका छह महीने के भीतर विधायक चुना जाना अनिवार्य है। वहीं राहुरी सीट पर भाजपा की रणनीति और संभावित उम्मीदवार पर भी राजनीतिक गलियारों में गहरी उत्सुकता बनी हुई है।
अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की कोर कमेटी ने एक महत्वपूर्ण बैठक में सुनेत्रा पवार को बारामती उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार चुना है। सुनेत्रा पवार ने हाल ही में राज्यसभा से इस्तीफा देकर राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है, जबकि उनके स्थान पर पार्थ पवार को राज्यसभा भेजा गया है। बारामती पवार परिवार का गढ़ रहा है, ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि सुनेत्रा पवार को भारी जनसमर्थन मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि सांसद सुप्रिया सुले सहित कई विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक शिष्टाचार और ‘दादा’ (अजित पवार) के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इस चुनाव को निर्विरोध कराने की इच्छा जताई है।
ये भी पढ़ें- मराठा आरक्षण: सफल हुआ या नहीं? जानें क्या कहती है शिंदे समिति की रिपोर्ट
राहुरी विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक रहे भाजपा के दिग्गज नेता शिवाजी भानुदास कर्डिले का पिछले साल अक्टूबर में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद से यह सीट खाली है और निर्वाचन आयोग ने यहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Special Summary Revision) का काम पहले ही पूरा कर लिया है। भाजपा इस सीट को बरकरार रखने के लिए कर्डिले परिवार के ही किसी सदस्य या किसी स्थानीय प्रभावी चेहरे पर दांव लगा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुरी में चुनावी मुकाबला कड़ा हो सकता है, बशर्ते यहां भी बारामती की तरह किसी सर्वसम्मति की स्थिति न बने।
निर्वाचन आयोग आमतौर पर चुनावी खर्च और सुरक्षा व्यवस्था के प्रबंधन के लिए उपचुनावों को बड़े विधानसभा चुनावों के साथ ही आयोजित करता है। मार्च के दूसरे सप्ताह में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में चुनावी बिगुल बजने वाला है। इसी दौरान महाराष्ट्र की इन दो सीटों पर मतदान की तारीखों का ऐलान हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में मतदान और नतीजे आने की संभावना है। यह उपचुनाव न केवल महायुति सरकार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है, बल्कि सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद की निरंतरता के लिए भी तकनीकी रूप से अनिवार्य है।