मराठा आरक्षण: सफल हुआ या नहीं? जानें क्या कहती है शिंदे समिति की रिपोर्ट

Maratha Reservation Shinde Committee Report: शिंदे समिति की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में 12 लाख से अधिक कुनबी प्रमाणपत्र बांटे गए। मृतकों के परिजनों को 10 लाख की मदद और नौकरी का ऐलान।
Maratha Reservation Shinde Committee Report
Maratha Reservation Shinde Committee Report (फोटो क्रेडिट-X)
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Manoj Jarange Patil Protest Success: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र को लेकर चल रहा लंबा संघर्ष अब निर्णायक सफलता की ओर बढ़ता दिख रहा है। मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व में हुए राज्यव्यापी आंदोलन के बाद गठित शिंदे समिति की ताजा रिपोर्ट ने इस लड़ाई में मिली बड़ी कामयाबी पर मुहर लगा दी है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 को मंत्रालय में हुई मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में यह जानकारी सामने आई कि राज्यभर में अब तक 48 लाख कुनबी रिकॉर्ड खोजे जा चुके हैं। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर 12 लाख 11 हजार 303 मराठा नागरिकों को कुनबी प्रमाणपत्र आवंटित किए जा चुके हैं, जो उनके लिए आरक्षण के द्वार खोलते हैं।

राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में शिंदे समिति के कामकाज का विस्तृत विवरण पेश किया गया। समिति ने रिकॉर्ड्स की छानबीन के दौरान पाया कि मराठा समाज के एक बड़े वर्ग के पूर्वजों के नाम कुनबी के रूप में दर्ज थे। विशेष रूप से छत्रपति संभाजीनगर विभाग में 2 लाख 57 हजार से अधिक प्रमाणपत्र बांटे गए हैं। यह डेटा न केवल जरांगे पाटिल के दावों की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर इस संवेदनशील मुद्दे को हल करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए हैं।

प्रमाणपत्र वितरण और जिलों की सांख्यिकी

शिंदे समिति रिपोर्ट के अनुसार, 12 लाख से अधिक लाभार्थियों में से अकेले बीड जिले में 34,692 कुनबी प्रमाणपत्र वितरित किए गए हैं। उपसमिति ने पुणे विभागीय आयुक्त को 'सतारा गॅझेटियर' लागू करने के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिससे पश्चिमी महाराष्ट्र के मराठा परिवारों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य उन सभी पात्र परिवारों तक पहुँचना है जिनके रिकॉर्ड्स पुराने सरकारी दस्तावेजों, वंशावलियों या गॅझेटियर्स में कुनबी के रूप में दर्ज हैं। इस प्रक्रिया ने मराठा समाज के भीतर सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की नई उम्मीद जगाई है।

आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों और सहायता पर निर्णय

बैठक में मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए कानूनी विवादों और मानवीय क्षति पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बताया गया कि आंदोलन के दौरान दर्ज कुल 161 मुकदमों में से 71 को वापस लेने की प्रक्रिया अभी लंबित है, जबकि मुंबई में दर्ज 8 में से 7 मुकदमे वापस लिए जा चुके हैं। सबसे संवेदनशील मुद्दा आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 306 व्यक्तियों का था। सरकार ने इनमें से 275 मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की है। यह सहायता राशि शोक संतप्त परिवारों को सहारा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अनुकंपा नियुक्तियाँ और शैक्षणिक छात्रवृत्ति का विस्तार

राज्य सरकार ने न केवल आर्थिक मदद बल्कि मृतकों के वारिसों को रोजगार देने का भी संकल्प दोहराया है। अब तक 21 वारिसों को राज्य परिवहन महामंडल में अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई है। इसके अतिरिक्त, MIDC, महावितरण और महानिर्मिती जैसी सरकारी कंपनियों को भी अपने बोर्ड में वारिसों को नौकरी देने का प्रस्ताव पारित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करते हुए, उपसमिति ने उन सभी पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्ति लागू करने का प्रस्ताव मांगा है, जो अभी तक इसके दायरे में नहीं थे। इससे मराठा समाज के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।

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