पुणे: जलवायु परिवर्तन के खतरे को देख जिले के 8 बड़े बांधों का होगा स्पेशल ऑडिट; 70 हजार घूस लेते बीट निरीक्षक
Pune Dam News: पुणे के खडकवासला सहित 8 प्रमुख बांधों की सुरक्षा और उम्र बढ़ाने के लिए सीडब्ल्यूपीआरएस करेगा विशेष ऑडिट; वहीं पिंपरी-चिंचवड़ में 70 हजार की रिश्वत लेते बीट निरीक्षक गिरफ्तार।
- Written By: रूपम सिंह
जलवायु परिवर्तन (सोर्सःसोशल मीडिया)
Pune Dam Safety Audit Illegal Construction Fine: जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए पुणे जिले के आठ प्रमुख बांधों की सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती का व्यापक तकनीकी ऑडिट शुरू किया गया है। इस पहल के तहत खडकवासला, पानशेत, वरसगांव, टेमघर, गुंजवणी, वीर, देवघर और भाटघर बांधों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। यह कार्य केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र (सीडब्ल्यूपीआरएस) द्वारा अगले एक वर्ष के भीतर पूरा किया जाएगा।
ऑडिट के दौरान बांधों के निर्माण से पहले किए गए सर्वेक्षण, निर्माण प्रक्रिया तथा अब तक के संचालन और रखरखाव के पूरे इतिहास का अध्ययन किया जाएगा। विशेषज्ञों की टीम बांधों की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियों, भूकंपीय मानदंडों, नींव की मजबूती, जलभराव क्षमता तथा जलाशयों में जमा गाद की स्थिति का परीक्षण करेगी। साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण इन सभी पहलुओं पर पड़ने वाले प्रभावों का भी वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
रिश्वत लेते बीट निरीक्षक रंगेहाथ अरेस्ट
विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर बांधों की आयु बढ़ाने, उनकी सुरक्षा मजबूत करने तथा भविष्य में संभावित जोखिमों को कम करने के लिए आवश्यक उपाय सुझाए जाएंगे। इस अध्ययन में टेमघर बांध को विशेष महत्व दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, टेमघर बांध का निर्माण कार्य अभी पूरी तरह पूर्ण नहीं हुआ है, इसलिए इसका अलग से विस्तृत सिविल ऑडिट किया जाएगा।
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सीडब्ल्यूपीआरएस के प्रभारी निदेशक अनिल पुरोहित ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत राज्य सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके बाद विशेषज्ञ समिति का गठन कर प्रत्यक्ष कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन भविष्य में जल संसाधन प्रबंधन और बांध सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जलवायु, अनियमित वर्षा और चरम मौसम की घटनाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए पुराने और महत्वपूर्ण बांधों की नियमित सुरक्षा जांच आवश्यक हो गई है। इस ऑडिट से बांधों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार करने में भी मदद मिलेगी। रिपोर्ट राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग को सौंपे जाने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कार्यों पर निर्णय लिया जाएगा।
