अजीत की मुंहजोरी, बीजेपी की मजबूरी, महायुति सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी छवि पर सवाल

Ajit Pawar Controversy: पिंपरी-चिंचवड चुनाव से पहले अजीत पवार के भ्रष्टाचार आरोपों ने महायुति सरकार में तनाव बढ़ा दिया है और भाजपा की भ्रष्टाचार-विरोधी छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Ajit Pawar Controversy
Ajit Pawar (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Pimpri Chinchwad Elections: पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के तीखे बयानों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। शुक्रवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अजीत पवार ने सत्तारूढ़ भाजपा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, जिससे महायुति सरकार की एकजुटता और भ्रष्टाचार-विरोधी छवि पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अजीत पवार ने कहा, “मुझ पर 70 हजार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, लेकिन जिन लोगों ने मुझ पर आरोप लगाए, आज मैं उन्हीं के साथ सरकार में बैठा हूं।” उनके इस बयान को महायुति गठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास पिंपरी-चिंचवड शहर के विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। सत्तारूढ़ दल का पूरा ध्यान भ्रष्टाचार के जरिए पैसा कमाने पर केंद्रित है। भाजपा शासनकाल में नगरपालिका की लगभग 8 हजार करोड़ रुपये की जमा राशि खर्च की गई, लेकिन उस धन से कौन-से विकास कार्य हुए, यह जनता के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए। अजीत पवार ने कहा कि पिंपरी-चिंचवड में लूट-खसोट करने वाली एक संगठित गैंग सक्रिय हो गई है। पीसीएमसी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है। राज्य में कानून का डर खत्म हो गया है और बड़े पैमाने पर हफ्तावसूली हो रही है। सड़कों, शिक्षा, कुत्तों की नसबंदी जैसी कई परियोजनाओं में भारी भ्रष्टाचार हुआ है।

टेंडर प्रक्रिया में खुलेआम दबंगई

उन्होंने दावा किया, “मेरे पास इन सभी आरोपों के सबूत हैं। टेंडर प्रक्रिया में खुलेआम दबंगई हो रही है। बिना प्रमाण के मैं किसी पर आरोप नहीं लगाता।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सवा किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 81 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, जो नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण है। इसी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए हम चुनावी मैदान में उतरे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमने कभी सत्ता का उन्माद नहीं पाला, लेकिन भाजपा को सत्ता की मस्ती, नशा और मदहोशी चढ़ गई है।

चाचा के पास लौट आएं अजीत

शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने अजीत पवार को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपने चाचा शरद पवार के पास लौट जाना चाहिए। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा को शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) में विलय कर लेना चाहिए, क्योंकि पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों के लिए दोनों गुटों ने हाथ मिला लिया है।

सत्ताधारी गठबंधन में तनाव के संकेत

भ्रष्टाचार के आरोपों पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भी भाजपा पर परोक्ष रूप से तंज कसते हुए अजीत पवार का समर्थन किया है। शिवसेना नेता और मंत्री उदय सामंत ने कहा कि पुणे में “शिवशक्ति बनाम धनशक्ति” जैसा मुकाबला हो रहा है। हमारे सामने धनशक्ति है। उन्होंने कहा, “हमें किसी की बुराई करने की जरूरत नहीं है। बुराई करने का काम अजीत पवार अच्छी तरह से कर रहे हैं।”

नेतृत्व की चेतावनी

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि अजीत पवार, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच यह तय हुआ था कि चुनाव के दौरान मित्र दलों के खिलाफ विवादित बयान नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, “फिर भी अजीत पवार ने ऐसा क्यों कहा, मुझे नहीं पता। उन्हें ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था।”

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने चेतावनी देते हुए कहा, “अजीत पवार को यह याद रखना चाहिए कि वह प्रधानमंत्री मोदी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं। यदि भाजपा ने जवाबी कार्रवाई की, तो अजीत पवार को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। मैंने पहले ही कहा था कि उन्हें महायुति में शामिल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए थी।”

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