पुणे: मनपा चुनाव के बाद बदलेंगे सत्ता समीकरण? सांसद सुनील तटकरे ने दिए भाजपा-एनसीपी गठबंधन के संकेत
BJP NCP Alliance: पुणे और पिंपरी-चिंचवड मनपा चुनाव के बाद भाजपा और एनसीपी (अजीत पवार गुट) के बीच सत्ता साझा करने की संभावना है। सांसद सुनील तटकरे ने परिणामों के बाद गठबंधन के संकेत दिए।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
Pimpri Chinchwad Election: पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) भले ही स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरे हों, लेकिन नतीजों के बाद सत्ता के समीकरण बदल सकते हैं।
एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि चुनाव परिणाम आने के बाद विकास और सत्ता के लिए दोनों दलों के बीच गठबंधन की पूरी संभावना है।
पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तटकरे ने कहा, ‘नामांकन दाखिल करते समय जो राजनीतिक माहौल था, वह अब पूरी तरह बदल चुका है।
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चुनावी नतीजों के आधार पर ही भविष्य का फैसला लिया जाएगा।’ उनके इस बयान को भाजपा के साथ संभावित गठबंधन की सुगबुगाहट के रूप में देखा जा रहा है। इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर और शहर अध्यक्ष प्रदीप देशमुख भी उपस्थित थे।
महायुति के घटक दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने पर तटकरे ने स्पष्ट किया कि परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना ही असली राजनीतिक कौशल है, जो अजीत पवार के पास है।
हम 2029 तक भाजपा के साथ रहेंगे
तटकरे ने कहा कि अजीत दादा का पुणे और पिंपरी-चिंचवड के विकास में ऐतिहासिक योगदान रहा है। गठबंधन के इतिहास पर चर्चा करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से लेकर अब तक कई मौकों पर भाजपा और एनसीपी के बीच सहयोग की स्थिति बनी है। तटकरे ने घोषणा करते हुए कहा, ‘हमने सामूहिक रूप से भाजपा के साथ जाने का निर्णय लिया है और हम 2029 तक भाजपा के साथ रहेंगे।
विलय का निर्णय शरद पवार को लेना है
दोनों एनसीपी गुटों के विलय के सवाल पर तटकरे ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है और इसका निर्णय शरद पवार गुट को लेना चाहिए, चुनाव में हो रहे आरोप-प्रत्यारोपों को उन्होंने चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
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तटकरे ने दावा किया कि एनसीपी के पास वर्तमान में नगर पालिका चुनावों के बाद 1,100 नगरसेवक और 30 नगराध्यक्ष हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी पार्टी को उम्मीद से अधिक सीटें मिलेंगी, क्योंकि वर्तमान दौर में किसी एक पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत पाना कठिन है।
