Sanjay Gandhi National Park (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar: एक सुबह, जिसने सब बदल दिया, 19 दिसंबर 2025 की सुबह भाईंदर पूर्व की पारिजात सोसाइटी में रहने वाली 23 वर्षीय अंजली टाक की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। सुबह करीब 7 बजे एक तेंदुआ पहली मंजिल तक चढ़कर उनके फ्लैट की बालकनी से अंदर घुस आया। अचानक हुए हमले में अंजली, उनकी मां भारती (48) और बहन खुशी (19) घायल हो गईं।
मां और बहन बाहर निकल गईं, लेकिन अंजली तेंदुए की गिरफ्त में आ गईं। पड़ोसियों की सूझबूझ से उन्हें छुड़ाया गया और तेंदुए को बाथरूम में बंद कर दिया गया। बाद में वन विभाग ने उसे बेहोश कर सुरक्षित रूप से संजय गांधी नेशनल पार्क में छोड़ दिया।
हमले में अंजली के चेहरे, पलक, नाक, होंठ और ऊपरी जबड़े पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत मुंबई के केईएम हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उनकी छह जटिल सर्जरी हुईं, जिनमें स्किन ग्राफ्टिंग भी शामिल थी। लगभग 30 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान आंखों की रोशनी बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन डॉक्टर सफल रहे। अंजली याद करती हैं, “दर्द असहनीय था, लेकिन मुझे एहसास था कि मैं जिंदा हूं।”
जनवरी में उनकी शादी तय थी, सगाई हो चुकी थी और तैयारियां चल रही थीं। हादसे के बाद डॉक्टरों ने छह महीने आराम की सलाह दी और शादी टालनी पड़ी। अंजली कहती हैं, “निशान जीवन भर रहेंगे, लेकिन मैं इन्हें अपनी कमजोरी नहीं बनने दूंगी।”
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मीरा-भाईंदर और आसपास के इलाकों में तेज़ शहरीकरण के कारण वन्यजीवों का दायरा सिमट रहा है। संजय गांधी नेशनल पार्क के आसपास बढ़ती आबादी के चलते तेंदुए भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों तक आ जाते हैं। फिर भी अंजली के मन में उस तेंदुए के लिए गुस्सा नहीं, बल्कि सहानुभूति है। उनका मानना है कि वह भूखा और डरा हुआ रहा होगा।
शारीरिक घाव भर रहे हैं, लेकिन मानसिक आघात अभी भी साथ है। हल्की आहट पर चौंक जाना और रात में नींद टूट जाना अब भी होता है। फिर भी परिवार का साथ और उनका मजबूत इरादा उन्हें आगे बढ़ा रहा है। आज अंजली के चेहरे पर सिलिकॉन पट्टियां हैं, पर आंखों में उम्मीद की चमक भी है। वे कहती हैं, “ठीक होने में समय लगेगा, लेकिन यह घटना मेरी पहचान नहीं बनेगी।”