Prakash Ambedkar on India US Trade Deal (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहाँ सरकार इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करार दे रहा है। वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को सीधे तौर पर घेरा है। आंबेडकर ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “धमकियों” के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है और यह समझौता पूरी तरह से “अमेरिका समर्थक” और “भारत विरोधी” है।
आंबेडकर की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति के उन दावों के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गया है। इस मुद्दे ने न केवल तेल आयात बल्कि भारतीय कृषि क्षेत्र की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का मानना है कि इस डील के दूरगामी परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से किसानों पर प्रतिकूल पड़ सकते हैं।
नरेंद्र मोदी, क्या आपने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है? क्या आप ट्रंप के इस दावे को स्वीकार कर रहे हैं कि पाकिस्तान के साथ सीज़फायर उन्होंने करवाया? ट्रंप ने कहा है कि हमने “रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से तथा संभावित रूप से वेनेज़ुएला… https://t.co/7UyymtQhWj — Prakash Ambedkar (@Prksh_Ambedkar) February 3, 2026
प्रकाश आंबेडकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए पूछा कि क्या भारत अब रूस से मिल रहे सस्ते तेल को छोड़कर वेनेजुएला से महंगा तेल खरीदेगा? उन्होंने ट्रंप के दावों का हवाला देते हुए पूछा, “क्या ट्रंप का यह दावा सही है कि हमने रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है? वेनेजुएला का तेल रूसी तेल की तुलना में काफी महंगा है, ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या बोझ पड़ेगा?” उन्होंने सरकार से मांग की कि तेल आयात नीति में होने वाले इस बड़े बदलाव पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
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इंडिया यूएस ट्रेड डील के व्यापार समझौते के कृषि पहलुओं पर चिंता व्यक्त करते हुए आंबेडकर ने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों का अधिक आयात भारतीय किसानों के लिए काल बन सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के कार्यबल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कृषि पर निर्भर है। “अगर अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिए जाते हैं, तो हमारे लाखों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब भारत सरकार अपनी नीतियां अमेरिका के इशारों पर तय कर रही है, जिससे स्वदेशी उत्पादन को भारी नुकसान पहुँच सकता है?
विपक्ष के इन तीखे हमलों के बीच मंगलवार (3 फरवरी) को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार का पक्ष रखा। गोयल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हुआ समझौता “बेहतरीन” है और इसमें देशहित व जनहित का पूरा ध्यान रखा गया है।
माननीय प्रधानमंत्री @NarendraModi जी ने हमेशा agriculture और dairy, इन दोनों सेक्टर्स को संभाला है, उनके हितों को संभाला है और इस क्षेत्र में लोगों को उज्ज्वल भविष्य मिले, उसके लिए लगातार काम किया है। कभी उनके हितों के साथ समझौता माननीय प्रधानमंत्री जी ने नहीं होने दिया। मुझे… pic.twitter.com/8XxhbuSk4Q — Piyush Goyal (@PiyushGoyal) February 3, 2026
उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों के साथ समझौता नहीं किया है। गोयल के अनुसार, यह डील भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर खोलेगी और पूरा देश प्रधानमंत्री के इस विजन को समझता है।