पनवेल महानगरपालिका (फाइल फोटो)
Panvel School Transfer Delay: पनवेल में स्कूलों के हस्तान्तरण को लेकर आवश्यक जिला परिषद की मूल्यांकन रिपोर्ट पिछले चार महीने से तैयार है, लेकिन मनपा ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। मनपा प्रशासन शिक्षा के लिए धन की कमी का हवाला दे रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मनपा विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन शिक्षा के नाम पर पैसों की कमी का हवाला दे रही है, जो सरासर निंदनीय है।
पता हो कि रायगढ़ जिला परिषद के 51 विद्यालयों के हस्तांतरण के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्रक्रिया में कोई प्रगति नहीं हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिला परिषद को लगभग 50 करोड़ रुपये की राशि दी जानी है, लेकिन ऐसी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी इस राशि को लेने से बचने और इसे मुफ्त में हस्तांतरित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
मनपा का वित्तीय कारोबार 100 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,000 करोड़ रुपये हो गया है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में कोई प्रगति नहीं होने की चर्चा है। फिलहाल, नगर मनपा के 10 स्कूलों में केवल 1,200 छात्र पढ़ते हैं, जबकि जिला परिषद के 51 स्कूलों में लगभग 12,000 छात्र स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यदि यह स्थानांतरण हो जाता है, तो छात्रों की संख्या 50,000 से अधिक हो सकती है। इस बारे में पनवेल मनपा के अतिरिक्त आयुक्त महेश कुमार मेघमाले ने बताया कि 51 जिला परिषद विद्यालयों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जिला परिषद के माध्यम से सरकार को रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया जारी है।
विधायक प्रशांत ठाकुर के बार-बार आग्रह के बावजूद ग्रामीण विकास मंत्री से लेकर शिक्षा सचिव तक के आदेश जारी किए गए, लेकिन मुआवजे की राशि पर सहमति न बन पाने के कारण प्रक्रिया अटकी रही है।
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इस नीतिगत विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य के शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ। के। एच। गोविंदराज को जिला संरक्षक सचिव नियुक्त किया। हालांकि, वे भी इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पाए। इसलिए, कॉलोनी फोरम की तरफ से मांग की गई है कि मुख्यमंत्री शिक्षा संबंधी विभागों के हस्तांतरण के लिए मनपा में स्वतंत्र आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति करें।