Manoj Patil Allegations VVMC Scam: वसई-विरार नगर निगम के पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर काले बादल मंडरा रहे हैं। नगर निगम में विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने प्रशासन पर करोड़ों रुपये के घोटालों, निविदा प्रक्रियाओं में धांधली और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पाटिल का दावा है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया है, जिससे आम करदाताओं के पैसे की भारी लूट हुई है। उन्होंने इस पूरे मामले पर ‘श्वेत पत्र’ जारी करने और विशेष ऑडिट कराने की मांग की है।
मनोज पाटिल ने महापौर अजीव पाटिल और नगर आयुक्त मनोज कुमार सूर्यवंशी को सौंपे गए अपने विस्तृत पत्र में कई विशिष्ट घोटालों का कच्चा चिट्ठा खोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिक सुविधाओं के नाम पर फिजूलखर्ची की गई और जिन ठेकेदारों पर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें ही फिर से बड़े टेंडर दिए गए। इन आरोपों के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं, जिससे आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
मनोज पाटिल ने अपनी शिकायत में ‘मानव संसाधन’ टेंडर का विशेष रूप से उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि नगर निगम ने श्रमशक्ति उपलब्ध कराने के लिए 150 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया, जिसमें उन्हीं कंपनियों को शामिल किया गया जिन्होंने 2012 से 2018 के बीच 3,165 श्रमिकों के पीएफ और बीमा के 122 करोड़ रुपये हड़पे थे। इसके अलावा, पार्कों की झीलों में लाइटिंग लगाने के लिए 6.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि वही सिस्टम बाजार में मात्र 1 करोड़ रुपये में उपलब्ध था। बिना तकनीकी सहमति और नक्शों के इस प्रोजेक्ट को पूरा कर सीधे तौर पर 5 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया।
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विपक्ष के नेता ने 900 करोड़ रुपये के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) टेंडर पर भी सवाल उठाए हैं, जिसे चुनावों से ठीक पहले जल्दबाजी में पास किया गया। उन्होंने ‘मैप माई इंडिया’ कंपनी को दिए गए सर्वेक्षण अनुबंध का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां नियमतः 3 प्रतिशत कमीशन होना चाहिए था, वहां कंपनी को 9 प्रतिशत की अत्यधिक दर पर ठेका दिया गया। इसके अलावा, नगर निगम में ‘वाहन भत्ता घोटाला’ भी जोरों पर है, जहां अधिकारी भत्ते भी ले रहे हैं और सरकारी वाहनों का व्यक्तिगत इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
वसई-विरार नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले दो वर्षों में अवैध निर्माणों की संख्या बढ़कर 10,803 हो गई है। मनोज पाटिल ने आरोप लगाया कि बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेशों और ग्रीन ट्रिब्यूनल की चेतावनियों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने लापरवाही के लिए नगर निगम पर अब तक 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे जनता के पैसों से भरा जा रहा है। सड़कों के ‘पैचवर्क’ के नाम पर हर साल होने वाले करोड़ों के खर्च को भी उन्होंने भ्रष्टाचार का बड़ा जरिया बताया है।