‘पालघर में हुआ चमत्कार’, चलती ट्रेन से गिरे शख्स की खाड़ी में बने पिलर और लोगों ने बचाई जान
Palghar Vaitarna Creek Accident: पालघर की वैतरणा खाड़ी में चलती ट्रेन से गिरे युवक उद्यन वांगड को स्थानीय लोगों ने नाव के जरिए सुरक्षित बचा लिया। युवक की हालत स्थिर है।
- Written By: अनिल सिंह
Man Falls in Vaitarna Creek (फोटो क्रेडिट-X)
Man Falls in Vaitarna Creek: महाराष्ट्र के पालघर जिले में वैतरणा खाड़ी के ऊपर एक ऐसा वाकया पेश आया जिसे देखने वाले ‘चमत्कार’ कह रहे हैं। बोईसर का रहने वाला एक युवक चलती ट्रेन से सीधे खाड़ी के गहरे पानी में जा गिरा, लेकिन मौत के मुहाने पर पहुँचने के बावजूद स्थानीय लोगों के साहस और एक निर्माणाधीन पिलर के सहारे उसकी जान बच गई। रात के अंधेरे में हुई इस घटना ने पालघर में सभी का दिल जीत लिया है और स्थानीय लोगों की जांबाजी की चर्चा हर तरफ हो रही है।
11 फरवरी 2026 की रात हुई यह घटना रेलवे सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चेतावनी भी है।
फिसला पैर और सीधे खाड़ी के पानी में समाया युवक
बोईसर निवासी उद्यन वांगड रात के समय उपनगरीय लोकल ट्रेन से सफर कर अपने घर लौट रहा था। ट्रेन जब वैतरणा खाड़ी पर बने ऊंचे पुल से गुजर रही थी, तभी अचानक उद्यन का संतुलन बिगड़ गया और वह चलती ट्रेन से सीधे नीचे खाड़ी में जा गिरा। रात का समय और खाड़ी का गहरा पानी परिस्थितियां पूरी तरह उद्यन के खिलाफ थीं, लेकिन गिरने के बाद उसने हिम्मत नहीं हारी। वह पानी के तेज बहाव के बीच तैरते हुए एक निर्माणाधीन कंक्रीट पिलर तक पहुँचने में सफल रहा और उसे कसकर पकड़ लिया।
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स्थानीय नागरिकों का अदम्य साहस और रेस्क्यू
जैसे ही उद्यन खाड़ी में गिरा, आसपास के इलाके में मौजूद स्थानीय नागरिकों को कुछ गिरने की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने टॉर्च की रोशनी में देखा, तो एक युवक पिलर के सहारे जिंदगी की भीख मांग रहा था। बिना एक पल की देरी किए, स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत अपनी मछली पकड़ने वाली नाव निकाली और अंधेरी रात में खाड़ी के खतरनाक पानी में उतर गए। कड़ी मशक्कत के बाद नागरिकों ने उद्यन को सुरक्षित नाव में खींचा और किनारे पर लेकर आए।
अस्पताल में भर्ती और सुरक्षा पर सवाल
हादसे में उद्यन को कुछ चोटें आई थीं, जिसके कारण उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने और स्थानीय लोगों द्वारा सही वक्त पर रेस्क्यू किए जाने के कारण उसकी स्थिति अब स्थिर बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे पुलों पर सुरक्षा उपायों और यात्रियों की बढ़ती भीड़ के खतरों को उजागर किया है। स्थानीय लोगों की बहादुरी ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझने से बचाया, बल्कि यह भी साबित किया कि सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
