Akhada Parishad protest (सोर्सः सोशल मीडिया)
Trimbakeshwar Akhada Parishad Protes: त्र्यंबकेश्वर मंदिर के सभामंडप में सुरक्षाकर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं के साथ की गई मारपीट की गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई दे रही है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साधु-महंतों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट को बर्खास्त कर इसे सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग की है। मारपीट की इस घटना के बाद देवस्थान के ट्रस्टियों द्वारा अपनाई गई भूमिका को महंतों ने निंदनीय बताया है।
अखाड़ा परिषद ने आरोप लगाया कि देवस्थान ट्रस्ट भक्तों की सेवा के लिए है, लेकिन ट्रस्टी स्वयं को मंदिर का मालिक समझने लगे हैं। ट्रस्ट के उस बयान पर भी कड़ा एतराज जताया गया, जिसमें कहा गया था कि पीड़ित श्रद्धालु नशे में था। साधु-संतों ने कहा कि यदि मंदिर परिसर में नशीले पदार्थ उपलब्ध हैं, तो यह पुलिस जांच का विषय है और प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
परिषद के अनुसार, नियमों के मुताबिक देवस्थान ट्रस्ट में राजनीतिक व्यक्तियों का समावेश नहीं होना चाहिए, लेकिन त्र्यंबकेश्वर में इस नियम का उल्लंघन हुआ है। राजनीतिक हितों के कारण भक्तों की सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।
साधु-महंतों ने चेतावनी दी कि यदि भक्तों को इसी तरह धमकाया और पीटा गया, तो इसका सीधा असर यहां के पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने यहां तक आह्वान किया कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होता, श्रद्धालु त्र्यंबकेश्वर न आएं। इस स्थिति से उत्पन्न होने वाले आर्थिक नुकसान के लिए केवल ट्रस्टी जिम्मेदार होंगे।
महंतों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान कर रही है, वहीं दूसरी तरफ दर्शन के लिए आने वाला भक्त सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा, “हम इसे हिंदुत्ववादी सरकार के रूप में देखते हैं, लेकिन हिंदुओं के ही तीर्थस्थल पर हिंदू भक्तों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” इस मामले की औपचारिक शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कुंभ मेला मंत्री से की जाएगी।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के कोषाध्यक्ष महंत शंकरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर में सुरक्षाकर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं की पिटाई और ट्रस्ट का अपमानजनक व्यवहार अत्यंत खेदजनक है। हिंदुओं के देवस्थान में भक्तों की अवहेलना घातक है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।