Godaghat Nashik disput (सोर्सः सोशल मीडिया)
Godaghat Nashik Dispute: आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा प्रस्तावित गोदाघाट भूमि अधिग्रहण और गोदावरी नदी के पात्र में पक्के निर्माण कार्यों का त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा तीव्र विरोध जारी है। बाजार भाव के अनुसार मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रभावित किसानों ने हिरामण खोसकर, राजाभाऊ वाजे तथा शोभाताई बच्छाव के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात की। हालांकि इस बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका, जिससे किसानों में नाराजगी बनी हुई है। जिलाधिकारी ने बताया कि इस विषय पर अगली चर्चा शुक्रवार 13 फरवरी को की जाएगी।
सिंहस्थ काल में त्र्यंबकेश्वर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। संभावित भगदड़ या दुर्घटनाओं से बचाव के लिए घाटों की संख्या बढ़ाने की सरकार की योजना है। लेकिन इन घाटों के निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण की दर को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। किसानों का आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में वर्तमान बाजार भाव लगभग 4 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है, जबकि सरकार ने मात्र 10 से 11 लाख रुपये प्रति एकड़ का दर घोषित किया है। उनका कहना है कि इस दर पर त्र्यंबकेश्वर से 10 किलोमीटर के दायरे में भी जमीन खरीदना संभव नहीं है। अन्यायपूर्ण मुआवजे के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है, ऐसी भावना प्रभावितों ने व्यक्त की।
इस बीच जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि घाट निर्माण का विषय सिंहस्थ कुंभमेळा प्राधिकरण से संबंधित है और अंतिम निर्णय प्राधिकरण द्वारा ही लिया जाएगा। साथ ही मंगलवार 16 फरवरी को सिंचाई विभाग के अधिकारियों और प्रभावित किसानों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक आयोजित की जाएगी। घाट निर्माण के दौरान कम से कम भूमि अधिग्रहण कैसे किया जा सकता है, इस पर चर्चा की जाएगी।
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किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि त्र्यंबकेश्वर में घाट सहित अन्य कुछ कार्य गोदावरी नदी के पात्र में किए जा रहे हैं। नदी का पात्र संरक्षित क्षेत्र होने के कारण किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। प्रशासन द्वारा बिना अनुमति कार्य शुरू किए जाने का दावा करते हुए प्रभावितों ने इसके विरोध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की चेतावनी दी है। बैठक में किशोर वारुंगसे, संदीप मुले, मोहन कडलग, वर्षा आडके, ज्ञानेश्वर वारुंगसे और अरुण दाते सहित अनेक किसान उपस्थित थे।