Sadhugram tree felling (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Environment Protest: तपोवन क्षेत्र में प्रस्तावित वृक्ष कटाई के मामले में सुनवाई को 100 दिन पूरे होने को हैं, लेकिन मनपा प्रशासन ने अब तक दर्ज आपत्तियों और हरकतों का जवाब नहीं दिया है। दूसरी ओर, शहर के विभिन्न हिस्सों जैसे कुसुमाग्रज काव्य उद्यान और गंगापुर-सुला वाइन रोड पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली को नासिक के पर्यावरण के साथ ‘प्रतिशोध’ करार देते हुए वृक्ष प्रेमियों ने शनिवार को तपोवन में एक दिवसीय प्रतीकात्मक उपवास किया।
तपोवन के 54 एकड़ क्षेत्र में साधुग्राम निर्माण के लिए 1,825 पेड़ों को काटने और उनके पुनरोपण का प्रस्ताव है। इस विषय पर पिछले नवंबर में जनसुनवाई हुई थी, जिसमें सैकड़ों पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध दर्ज कराया था। नियमानुसार प्रशासन को इन आपत्तियों का लिखित जवाब देना अनिवार्य है, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी कोई उत्तर नहीं दिया गया है। इसी के विरोध में ‘तपोवन प्रेमी नासिककर’ समूह ने यह आंदोलन किया।
आंदोलनकारियों का नेतृत्व कर रहे अमित कुलकर्णी और भारती जाधव ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन शुरू से ही इस मामले में तथ्यों को छुपा रहा है। उनका कहना है कि गंगापुर रोड और अन्य क्षेत्रों में नोटिस देर से चिपकाए जाते हैं, ताकि नागरिकों को आपत्ति दर्ज कराने का समय न मिले। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों में सुनवाई की तारीख और समय एक ही रखा जाता है, जिससे पर्यावरण प्रेमी सभी स्थानों पर उपस्थित नहीं हो पाते।
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न्यायालयीन स्थिति: राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने तपोवन में वृक्षों की कटाई पर 6 अप्रैल तक अंतरिम रोक बरकरार रखी है।
अवैध कटाई का दावा: अंबरिश मोरे और अन्य कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुंभ मेले के नाम पर उन स्थानों पर भी पेड़ काटे जा रहे हैं, जिनका मेले से सीधा संबंध नहीं है।
इस उपवास में भारती जाधव, राजू देसले, अमित कुलकर्णी, हेमंत जाधव, जगबीर सिंह, मुक्ता कावले, सुनील शेंडे सहित नवी मुंबई से आए पर्यावरण कार्यकर्ता भी शामिल हुए। वृक्ष प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि मनपा ने नियमानुसार आपत्तियों का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया और अवैध वृक्ष कटाई बंद नहीं की, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।