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तीसरी बार विकास योजना पर संकट, मीरा-भाईंदर की प्रस्तावित डीपी रद्द करने का प्रस्ताव पारित

Mira Bhayandar DP: मीरा-भाईंदर मनपा की आमसभा में बहुप्रतीक्षित विकास योजना (डीपी) को रद्द कर नए सिरे से तैयार करने का प्रस्ताव पारित हुआ, जिस पर अब राज्य सरकार का अंतिम फैसला बाकी है।

  • Written By: आंचल लोखंडे
Updated On: Feb 21, 2026 | 07:16 PM

Mira Bhayandar municipal corporation (सोर्सः सोशल मीडिया)

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Mira Bhayandar Municipal Corporation: मीरा-भाईंदर शहर की पहली डीपी वर्ष 2007 में समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद तैयार दूसरी डीपी लीक होने के कारण रद्द करनी पड़ी थी। अब तीसरी बार प्रस्तावित डीपी को भी निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मनपा की आमसभा में शहर की बहुप्रतीक्षित डेवलपमेंट प्लान (डीपी) को रद्द कर नए सिरे से तैयार करने का अहम प्रस्ताव पारित कर दिया गया। सात वर्षों की कवायद और लगभग 5.50 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद तैयार इस योजना को लेकर सदन में तीखी बहस हुई। अब आमसभा का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जहां से अंतिम फैसला होगा कि डीपी रद्द होगी या उसमें सुधार कर उसे लागू किया जाएगा।

आमसभा में सत्ताधारी भाजपा की ओर से डीपी रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर पक्ष-विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा हुई। सदस्यों ने योजना में कई खामियों की ओर इशारा किया। भाजपा पार्षदों का आरोप था कि कई प्रस्तावित सड़कों को डीपी में शामिल नहीं किया गया है, जिससे उन मार्गों पर स्थित इमारतों के पुनर्विकास में बाधा आएगी। हरित क्षेत्र और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित भूखंडों में बदलाव कर उन्हें आवासीय क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। कुछ अधिकारियों पर बिल्डरों से मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए। भाजपा के सुरेश खंडेलवाल ने सदन में कहा कि डीपी की त्रुटियों के कारण शहर के भविष्य के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

विपक्ष ने जताई आपत्ति

कांग्रेस गुट नेता जय ठाकुर ने डीपी रद्द करने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना को तैयार करने में सात साल का लंबा समय और 5.50 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। ऐसे में इसे पूरी तरह रद्द करने के बजाय आवश्यक सुधार कर लागू किया जाना चाहिए। विपक्ष ने यह भी तर्क दिया कि प्रस्तावित डीपी को रद्द करने का अंतिम अधिकार राज्य सरकार के पास है, इसलिए आमसभा को सुधारात्मक सुझाव भेजने चाहिए, न कि पूरी योजना निरस्त करने की सिफारिश।

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सर्वदलीय समिति करेगी नई रूपरेखा तैयार

यदि राज्य सरकार डीपी रद्द करने के प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो नए सिरे से विकास योजना बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए एक सर्वदलीय समिति गठित की गई है। समिति शहर की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भू-आरक्षण, बुनियादी सुविधाओं और यातायात ढांचे की नई रूपरेखा तैयार करेगी।

क्लस्टर योजना पर बदला रुख

शहर की एकीकृत विकास योजना (क्लस्टर) को लेकर भी आमसभा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। लंबे समय तक क्लस्टर योजना का विरोध करने वाली भाजपा ने इस बार यू-टर्न लेते हुए योजना को बरकरार रखने का समर्थन किया, लेकिन इसके 24 प्रारूप रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया। यह प्रस्ताव भी अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

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पुनर्विकास की प्रक्रिया तेज

संकरे क्षेत्रों की जर्जर और पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के लिए 5 दिसंबर 2025 को जारी मिनी क्लस्टर अधिसूचना में बदलाव के सुझाव भी दिए गए हैं। मनपा ने राज्य सरकार को निम्न प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है। न्यूनतम क्षेत्रफल 2,500 वर्ग मीटर से घटाकर 2,000 वर्ग मीटर किया जाए, कम से कम पांच इमारतों की अनिवार्यता समाप्त की जाए, तथा 18 मीटर की जगह 12 मीटर चौड़ी सड़क का प्रावधान रखा जाए। मनपा का मानना है कि इन बदलावों से पुनर्विकास की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और तेज हो सकेगी।

वर्तमान में उत्तन के छह गांव और शेष मीरा-भाईंदर क्षेत्र के लिए अलग-अलग विकास योजनाएं प्रस्तावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही शहर में दो डीपी लागू होने से विकास कार्यों में तकनीकी विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हैं। यदि सीमा रेखा में थोड़ी भी भिन्नता हुई तो परियोजनाओं की मंजूरी प्रभावित हो सकती है।

अब निगाहें राज्य सरकार पर

मीरा-भाईंदर के भविष्य के विकास की दिशा अब राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर है। यदि डीपी रद्द होती है तो नई योजना बनाने में फिर समय और संसाधन लगेंगे। वहीं, यदि सुधार के साथ इसे मंजूरी मिलती है तो शहर में लंबित विकास कार्यों को गति मिल सकती है। शहरवासी और जनप्रतिनिधि अब राज्य सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यही निर्णय आने वाले वर्षों में मीरा-भाईंदर की विकास दिशा तय करेगा।

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Published On: Feb 21, 2026 | 07:16 PM

Topics:  

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