severely malnourished children (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Malnutrition: नासिक जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमकार पवार की संकल्पना और मार्गदर्शन में 15 अगस्त 2025 से शुरू की गई पोषणदूत योजना के उत्साहजनक और सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए मंगलवार को जिला परिषद नासिक में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की संयुक्त समन्वय बैठक आयोजित की गई।
इस अभिनव योजना के तहत जिला एवं तालुका स्तर के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों ने अति तीव्र कुपोषित बच्चों को गोद लिया है। प्रत्येक अधिकारी संबंधित बच्चे के पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहा है। योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए तालुका स्तर पर बाल विकास परियोजना अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
बैठक के दौरान सीईओ ओमकार पवार ने बताया कि नवंबर 2025 के अंत तक जिले के कुल 208 अति तीव्र कुपोषित बच्चों में से 39 बच्चे अब ‘सामान्य’ श्रेणी में आ चुके हैं, जबकि 45 बच्चों की स्थिति में सुधार होकर वे ‘मध्यम कुपोषित’ श्रेणी में पहुंचे हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए पालक अधिकारियों की सराहना की और निर्देश दिए कि दिसंबर 2025 में पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत नए 368 बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
बैठक में कुपोषित बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, मासिक गृह भेंट, एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) में भर्ती, टीकाकरण और पोषण ट्रैकिंग जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। इसके साथ ही पलायन करने वाले परिवारों के बच्चों के लिए विशेष समन्वय व्यवस्था करने तथा परिवार नियोजन एवं दो बच्चों के बीच उचित अंतर रखने को लेकर परामर्श देने के निर्देश भी दिए गए।
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इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधाकर मोरे, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी प्रताप पाटिल, यूनिसेफ के विभागीय सलाहकार नितिन वसईकर सहित सभी तालुका स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि पोषणदूत योजना जिले में कुपोषण की समस्या को जड़ से कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।