NMRDA ने तैयार किया नासिक रिंग रोड मास्टर प्लान; किसानों को मिले 3 विकल्प, मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी
Nasik NMRDA Ring Road Project: नासिक में एनएमआरडीए ने 16 गांवों के विकास के लिए रिंग रोड मास्टर प्लान तैयार किया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद किसानों को जमीन विकास के लिए 3 विकल्प दिए गए हैं।
- Written By: रूपम सिंह
एनएमआरडीए रिंग रोड, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Devendra Fadnavis Nasik NMRDA Ring Road Project: नासिक सिंहस्थ परिक्रमा मार्ग अर्थात बाह्य रिंग रोड परियोजना को उच्च न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद नासिक महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) ने रिंगरोड से जुड़े क्षेत्रों के विकास के लिए व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत नासिक शहर के साथ नासिक और दिंडोरी तालुका के 16 गांवों के नियोजित विकास का खाका तैयार किया गया है। विकल्पों प्राधिकरण ने किसानों को तीन में से किसी एक को चुनने की सुविधा दी है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि किसान इन विकल्पों को स्वीकार करते हैं तो नासिक शहर की दिंडोरी, इगतपुरी, त्र्यंबकेश्वर और निफाड जैसे क्षेत्रों से कनेक्टिविटी और अधिक तेज और सुगम हो जाएगी।मुख्यमंत्री के समक्ष किया जाएगा प्रस्तुत यह मास्टर प्लान एनएमआरडीए के आयुक्त जलज शर्मा और उपसंचालक दीपक वराडे द्वारा तैयार किया गया है।
इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां मुख्यमंत्री ने इस योजना को नासिक के तीव्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए मंजूरी दे दी। उपसंचालक दीपक वराडे ने कहा कि एनएमआरडीए क्षेत्र के विकास के लिए मजबूत सड़क नेटवर्क तैयार करना आवश्यक है। उनके अनुसार, इस योजना से पूरे क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव होगा और बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
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1 मार्च 2017 को एनएमआरडीए की हुई स्थापना
राज्य सरकार ने मुंबई और पुणे की तर्ज पर 1 मार्च 2017 को अधिसूचना जारी कर नासिक महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की स्थापना की थी। इसके बाद 12 जनवरी 2018 को जारी नई अधिसूचना के तहत एनएमआरडीए को विशेष नियोजन प्राधिकरण नियुक्त किया गया। आगे चलकर 22 सितंबर 2026 को विकास योजना तैयार करने का इरादा सार्वजनिक किया गया।
अब विकास योजना लागू होने के बाद इस क्षेत्र में सड़कों और विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के लिए आरक्षण तय किए जाएंगे, जिससे नियोजित विकास को गति मिलेगी। इस प्रक्रिया का पहला चरण 66 किलोमीटर लंबे रिंगरोड क्षेत्र से शुरू किया गया है। एनएमआरडीए में शामिल गांवों के लिए तैयार इस मास्टर प्लान से क्षेत्रीय विकास और संपर्क व्यवस्था में बड़ा सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। योजना के तहत सड़क नेटवर्क, ओझर विमानतल का विकास तथा रेलवे स्टेशन उन्नयन जैसी परियोजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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पहला विकल्प पहले विकल्प के तहत
एनएमआरडीए 12 मीटर, 18 मीटर, 24 मीटर और 30 मीटर चौड़ी सड़कों सहित सभी सार्वजनिक सुविधाओं का विकास अपने खर्च पर करेगा। साथ ही भूखंडों की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। विकास कार्य पूर्ण होने के बाद कुल जमीन का 60 प्रतिशत हिस्सा जमीनधारकों को वापस सौंप दिया जाएगा।
दूसरा विकल्प
दूसरे विकल्प में सड़क और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आवश्यक 40 प्रतिशत भूमि एनएमआरडीए अपने नियंत्रण में लेकर उसका विकास करेगा। शेष भूमि जमीनधारकों के पास रहेगी और वे अपनी योजना एवं आवश्यकता के अनुसार उसका विकास करने के लिए स्वतंत्र होंगे। इस मॉडल में भी जमीनधारकों को प्राधिकरण को किसी प्रकार का प्रीमियम नहीं देना होगा।
तीसरा विकल्प तीसरे विकल्प के तहत
एनएमआरडीए केवल सड़कों के विकास और नियोजन पर नियंत्रण रखेगा, जबकि बाकी जमीन जमीनधारक के पास ही बनी रहेगी। सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आवश्यक भूमि जमीनधारक को एनएमआरडीए को हस्तांतरित करनी होगी, जिसके बाद उस क्षेत्र का विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।
