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रामकुंड परिसर दो महीने के लिए बंद; रामकाल पथ परियोजना का काम शुरू होने से बाहर से आए श्रद्धालुओं में नाराजगी

Nasik Kalaram Temple: नासिक में रामकाल पथ परियोजना के तहत रामकुंड परिसर को 16 मई से 2 महीने के लिए बंद कर दिया गया है। अचानक लिए गए इस फैसले से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी हो रही है।

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: May 17, 2026 | 07:14 AM

रामकुंड परिसर (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

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Nasik Ramkund Kalaram Temple Ramkal Path Project: नासिक रामकुंड से कालाराम मंदिर तक विकसित किए जा रहे रामकाल पथ परियोजना के महत्वपूर्ण चरण के तहत रामकुंड और आसपास के घाटों पर विकास कार्य शुरू कर दिए गए हैं। इसके चलते शनिवार 16 मई से 2 महीने के लिए रामकुंड परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पहले ही दिन इस निर्णय का असर बाहर से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर देखने को मिला।

रामकाल पथ परियोजना के अंतर्गत गोदावरी नदी किनारे घाट क्षेत्र में विभिन्न विकास और सौंदर्याकरण कार्य किए जा रहे हैं। अब तक रामकुंड को छोड़कर अन्य स्थानों पर काम चल रहा था। परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण चरण के रूप में रामकुंड के विस्तार कार्य को देखा जा रहा है। यही वह स्थान है जहां पिंडदान और अस्थि विसर्जन जैसे धार्मिक विधि-विधान संपन्न किए जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में काम शुरू करने को लेकर पहले मतभेद भी सामने आए थे। इसी कारण पहले अन्य घाटों पर काम किया जा रहा था। इस पृष्ठभूमि में शुक्रवार को मनपा आयुक्त मनीषा खत्री ने पुरोहित महासंघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की।

परिसर हुआ अतिक्रमण मुक्त

बैठक में धार्मिक विधियों के लिए वैकल्पिक स्थान तय करने पर सहमति बनी, जिसके बाद शनिवार से रामकुंड परिसर को बंद कर दिया गया। रामकुंड विस्तार कार्य के लिए कुछ महीने पहले ही यहां स्थित वस्त्र परिवर्तन गृह को तोड़ा गया था। साथ ही आसपास के अतिक्रमण हटाकर क्षेत्र को खाली कराया गया। पहले वस्त्र परिवर्तन गृह के नीचे पिंडदान जैसे धार्मिक कार्यक्रम होते थे, जबकि सामने गांधी तालाब के पास स्थित छत्री में दशक्रिया विधि संपन्न की जाती थी। अब रामकुंड में सीधे विकास कार्य शुरू होने के कारण 16 मई से 16 जुलाई तक दो महीने तक श्रद्धालुओं को गांधी तालाब में अस्थि विसर्जन और पिंडदान करना होगा।

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श्रद्धालुओं और पर्यटकों में नाराजगी नासिक महापालिका द्वारा शुक्रवार शाम को अचानक रामकुंड परिसर बंद करने का निर्णय लिया गया। इसके कारण शनिवार को धार्मिक विधियों के लिए पहुंचे बाहरगांव के श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, गर्मी की छुट्टियों में पर्यटन के लिए आए पर्यटक भी रामकुंड का दर्शन और तीर्थ स्नान नहीं कर सके, जिससे उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। रामकुंड क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गोदावरी तट पर आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन को आवश्यक मानते हैं। हालांकि अब अगले दो महीने तक यहां विकास कार्य चलते रहेंगे।

वाहनों की आवाजाही भी हुई बंद

सिंहस्थ कुंभ मेले के तहत 31 अक्टूबर को रामकुंड के पास पुरोहित संघ का ध्वजारोहण प्रस्तावित है। उससे पहले रामकाल पथ और घाट विकास कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कारण रामकुंड की ओर जाने वाले मार्ग श्रद्धालुओं, नागरिकों और वाहनों के लिए बंद कर दिए गए है। महापालिका के अनुसार, होलकर पुल और मालेगांव स्टैंड से दुतोंड्या मारुति की ओर जाने वाला रास्ता भी यातायात के लिए बंद रहेगा।

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बारिश में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

मानसून से ठीक पहले शुरू हुए इन कार्यों के कारण बारिश के दौरान श्रद्धालुओं को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। रामकुंड क्षेत्र में बारिश से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और विकास कार्य भी जारी रहेंगे। ऐसे में यदि गोदावरी नदी में बाढ़ आती है तो धार्मिक विधियां कहां और कैसे होंगी, यह बड़ा सवाल बन सकता है, पूर्व में गोदावरी का पानी कपालेश्वर मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच चुका है।

इसी बीच जनगणना कार्य के लिए महापालिका कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने से आगामी एक महीने तक मनपा के नियमित कामकाज पर असर पड़ने की संभावना है। स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद शनिवार से शहर में घर-घर जाकर जनगणना शुरू कर दी गई है।

इसके लिए करीब 4300 प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए है, जिनमे महापालिका के लगभग 800 कर्मचारी शामिल है। इनमें शिक्षक, लिपिक तथा विभिन्न विभागीय कार्यालयों के कर्मचारी भी शामिल है। 16 मई से 14 जून तक घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी और कर्मचारियों को इसे प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

Ramkund closed ramkal path project nasik

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Published On: May 17, 2026 | 07:14 AM

Topics:  

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