जिला परिषद में डिजिटल सिस्टम फेल (सोर्स: सोशल मीडिया)
ZPFMS System Down In Nashik: डिजिटल इंडिया के दौर में महाराष्ट्र के ग्राम विकास विभाग की एक बड़ी तकनीकी विफलता सामने आई है। नासिक जिला परिषद, जो अब तक अपनी भुगतान प्रणाली और प्रशासनिक कार्यों के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही थी, वह अब वापस पुराने ‘कागज-कलम’ के दौर में लौट आई है। जिला परिषद की ऑनलाइन भुगतान प्रणाली ZPFMS (Zilla Parishad Financial Management System) के अचानक बंद होने से करोड़ों रुपये का लेन-देन और प्रशासनिक कार्य अधर में लटक गया है।
इस प्रणाली को विकसित करने वाली निजी आईटी कंपनी और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के बीच आपसी विवाद पैदा हो गया है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी ने अपनी डिजिटल सेवाएं तत्काल प्रभाव से रोक दी हैं। 31 मार्च 2026 की रात से यह सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई, जिससे नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही जिला परिषद को बड़ा झटका लगा। ग्राम विकास विभाग ने नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) जैसे सरकारी संस्थानों के बजाय निजी वेंडरों को प्राथमिकता दी, जो अब गले की फांस बन गई है।
सिस्टम बंद होने के कारण ठेकेदारों के बिल, विकास कार्यों के भुगतान और कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय कार्य पूरी तरह रुक गए हैं। ग्राम विकास विभाग ने मजबूरी में जिला परिषदों को अब ‘ऑफलाइन’ काम करने और भौतिक फाइलों के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। डिजिटल सिस्टम भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया था, लेकिन ऑफलाइन प्रक्रिया से काम में देरी और गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है।
यह पहली बार नहीं है जब ग्राम विकास विभाग का डिजिटल सिस्टम बीच में लड़खड़ाया है। इससे पहले ‘सी-डैक’ द्वारा विकसित PMS प्रणाली का 40 लाख रुपये का वार्षिक भुगतान न करने के कारण वह बंद हो गई थी। विशेषज्ञों का सवाल है कि जब अन्य सरकारी विभाग NIC जैसे सुरक्षित और स्थायी प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, तो ग्राम विकास विभाग बार-बार निजी कंपनियों के जाल में क्यों फंसता है?
इस संकट ने नासिक सहित पूरे महाराष्ट्र की जिला परिषदों में असमंजस और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण विकास के पहिये थमने की कगार पर हैं, और सरकार के पास फिलहाल इसका कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है।