न प्लेटफॉर्म तैयार, न पार्किंग, ढाई साल बाद भी अधूरा गोधनी स्टेशन; अमृत भारत योजना पर उठे सवाल
Nagpur Godhani Station: अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत गोधनी स्टेशन के पुनर्विकास का भूमिपूजन 2023 में हुआ था, लेकिन ढाई साल बाद भी यात्रियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
गोधनी स्टेशन, अमृत भारत योजना,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur Amrit Bharat Station Scheme: नागपुर प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में 6 अगस्त 2023 को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत गोधनी स्टेशन के पुनर्विकास कार्य का भूमिपूजन बड़े उत्साह के साथ किया गया था। हालांकि ढाई वर्ष से अधिक बीतने के बाद भी यात्रियों को कोई ठोस राहत नहीं दे सकी है।
ऐसे में यदि ‘ढाई दिन चले, अढाई कोस’ वाली कहावत यहां ‘ढाई साल चले, अढ़ाई कोस’ कर दी जाये तो गलत नहीं होगा। इस दौरान न हाईलेवल प्लेटफॉर्म तैयार है, न पार्किंग, न शेड और न ही वे सुविधाएं जिनके दम पर इसे आधुनिक स्टेशन बताया जाना था। गडकरी के गढ़ यानी गृह जिले में ही यह सुस्ती अब रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
रैंप, पार्किंग, शेड… वादों की सूची लंबी, उपलब्धियां शून्य
यात्रियों की सुविधा के लिए रैंप, पार्किंग, शेड, बेहतर प्रवेश द्वार और आधुनिक सुविधाओं का वादा किया गया था। लेकिन धरातल पर तस्वीर उलट है। स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को आज भी वही पुरानी अव्यवस्था झेलनी पड़ रही है, न पार्किंग तैयार हुई, न पर्याप्त शेड पूरे हो सके हैं और न ही यात्रियों के लिए सुविधाजनक पहुंच व्यवस्था विकसित हो सकी।
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करोड़ों रुपये की परियोजना के बीच यात्री आज भी पूछ रहे हैं कि आखिर उन्हें अभी तक क्या मिला और कथित विश्वस्तरीय सुविधायें कब मिलेगी। हालत ये है कि यहां आधारभूत यात्री सुविधायें भी नहीं मिल रही तो फिर ट्रेनों को डायवर्जन बहुत दूर की बात है।
करोड़ों रुपए हो रहे खर्च, फिर भी देरी क्यों
- 2.81 करोड़ इलेक्ट्रिक कार्य
- 1.34 करोड़ सर्कुलेटिंग एरिया रोड (960 मी. लंबाई, 7.50 मी. चौड़ाई)
- 6.94 करोड़ : न्यू स्टेशन बिल्डिंग
- 1.03 करोड़ एप्रोच रोड (1200 मी.)
- 1.01 करोड़ पैदल मार्ग
- घोषित बजट: 28.94 करोड
- (कानूनी अड़चनों के साथ निर्माण में देरी के चलते लागत बढ़ना तय।)
- 12.46 करोड़ FOB (67 मी लंबाई, 12 मी. चौडाई, लिफ्ट व एस्केलेटर)
छवि पर भी सवाल
गडकरी की पहचान देश में तेज गति से परियोजनाएं पूरी कराने वाले मंत्री की रही है। ऐसे में उनके ही गृह क्षेत्र की यह परियोजना कछुआ चाल से आगे बढ़ रही है। वर्तमान स्थिति देखकर यही कहा जा सकता है कि यहां विकास की ट्रेन अभी भी प्लेटफॉर्म पर खड़ी है। ढाई वर्ष में यदि यात्री एक भी प्रमुख सुविधा का लाभनहीं उठा पाए हैं तो यह सिर्फ देरी नहीं बल्कि जवाबदेही की भी परीक्षा है।
क्या-क्या सुविधायें मिलनी हैं…
स्टेशन भवन का आधुनिकीकरण, बेहतर प्रतीक्षालय, शेड, स्वच्छता सुविधाएं, पार्किंग, आधुनिक टिकटिंग सिस्टम और यात्रियों के लिए सुगम पहुंच मार्ग।
प्लेटफॉर्म का विस्तार, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, दिव्यांगजनों के लिए रैंप और लिफ्ट।
स्टेशन परिसर का सौंदर्याकरण और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था।
जून तक मिलना था तीसरा प्लेटफॉर्म
गोधनी स्टेशन के पुनर्विकास का सबसे अहम हिस्सा हाईलेवल प्लेटफॉर्म था लेकिन ढाई साल बाद भी यह लक्ष्य यात्रियों के लिए मृगतृष्णा बना हुआ है।
जिस प्लेटफॉर्म को देखकर यात्रियों को आधुनिक रेलवे स्टेशन का अहसास होना था वहां आज भी अधूरे ढांचे और निर्माण सामग्री ही नजर आती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यहां से हावड़ा रूट की करीब 8 जोड़ी ट्रेनों के संचालन को ध्यान में रखते हुए जून 2026 तक तीसरा प्लेटफॉर्म तैयार होना था। मई समाप्त होने को है लेकिन लक्ष्य अब भी अधूरा है।
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सूत्रों के अनुसार, ट्रैक अपग्रेडेशन लगभग पूरा हो चुका है। मध्य रेल के साथ दक्षिण-पूर्व-मध्य रेल के महाप्रबंधक द्वय भी निरीक्षण कर चुके हैं। इंतजार है तो नये प्लेटफॉर्म का।
इस देरी का सबसे बड़ा नुकसान नागपुर स्टेशन पुनर्विकास परियोजना को हो रहा है। गोधनी स्टेशन तैयार होने पर ट्रेनों का दबाव वहां शिफ्ट कर नागपुर स्टेशन पर तेजी से काम होना था लेकिन गोधनी की सुस्ती ने पूरी रणनीति की पटरी ही बदलती दिख रही है।
ऐसे में नागपुर स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही के बीच निर्माण कार्य करने की मजबूरी बनी हुई है। यानी एक अधूरा प्रोजेक्ट दूसरे प्रोजेक्ट की राह में भी रोडा बन गया है।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से सतीश दंडारे की रिपोर्ट
