Chhatrapati Sambhajinagar Air Pollution: भीषण गर्मी के साथ खराब श्रेणी में पहुँचा वायु प्रदूषण, AQI 150 के पार

Air Pollution News: छत्रपति संभाजीनगर में गर्मी के साथ वायु प्रदूषण बढ़ा। AQI 150 पहुँचा, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जानें PM 2.5 स्तर, स्वास्थ्य सलाह और प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण।
Chhatrapati Sambhajinagar Air Pollution: Amidst scorching heat, air pollution reaches 'Poor' category; AQI crosses 150.
वायु प्रदूषण की प्रतीकात्मक फोटो (डिजाइन फोटो)
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AQI Level 150 In Chhatrapati Sambhajinagar: शहरवासी इन दिनों न केवल आसमान से बरसती आग से परेशान हैं, बल्कि जहरीली हवा का संकट भी गहरा गया है। बढ़ते तापमान के साथ शहर का वायु प्रदूषण स्तर (Air Pollution Level) चिंताजनक रूप से बढ़ गया है। पिछले एक सप्ताह में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 140 से 150 के बीच दर्ज किया गया है, जो 'खराब' श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है।

आंकड़ों में प्रदूषण का सच: संवेदनशील और खराब दिनों की भरमार

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शहर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। हवा में अति सूक्ष्म कणों (PM 2.5) का स्तर औसतन 51 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया है। ये कण सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक जाकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।

साल का लेखा-जोखा

इस वर्ष जनवरी से अब तक के 103 दिनों में से 50 दिन वायु गुणवत्ता 'संवेदनशील' रही। 35 दिन हवा 'खराब' स्तर पर रही।18 दिन 'मध्यम' श्रेणी में दर्ज की गई। इन 103 दिनों में एक भी दिन शहर की हवा पूरी तरह स्वच्छ (Clean Air Days) नहीं पाई गई।

क्यों बढ़ रहा है गर्मी में प्रदूषण? मुख्य कारण

विशेषज्ञों ने गर्मी और प्रदूषण के इस घातक संयोजन के पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं जैसे उच्च तापमान और रासायनिक प्रतिक्रिया: शहर का अधिकतम तापमान 41.4°C तक पहुँच गया है। तेज गर्मी के कारण हवा में मौजूद प्रदूषकों के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाएं तेज हो जाती हैं, जिससे ओजोन (Ground-level Ozone) जैसे हानिकारक तत्व बनते हैं।

सूखी जमीन और धूल (PM-10)

भीषण गर्मी के कारण जमीन पूरी तरह सूख चुकी है, जिससे वाहनों की आवाजाही और निर्माण कार्यों के कारण धूल के कण आसानी से हवा में मिलकर प्रदूषण बढ़ाते हैं। शहर में बढ़ता कंक्रीट और डामर का फैलाव 'हीट आइलैंड इफेक्ट' पैदा करता है, जिससे गर्मी और प्रदूषण दोनों तीव्र हो जाते हैं। हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक वातावरण में ही फंसे रह जाते हैं और बिखर नहीं पाते। वाहनों का धुआं, अनियंत्रित निर्माण कार्य और औद्योगिक इकाइयाँ वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत बने हुए हैं।

स्वास्थ्य सलाह: बच्चे और बुजुर्ग रहें सावधान

महानगरपालिका के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बालकृष्ण राठोड़कर ने शहरवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बढ़ता AQI दमा (Asthma), हृदय रोग और अन्य श्वसन संबंधी मरीजों के लिए अधिक जोखिम भरा है। सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण स्तर अधिक होता है, तब लोगों को अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए। बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग करना चाहिए।

कुल मिलाकर, गर्मी और प्रदूषण के इस दोहरे वार से बचने के लिए नागरिकों को व्यक्तिगत स्तर पर सावधानी बरतने के साथ-साथ प्रशासन को भी धूल नियंत्रण और वाहन प्रदूषण पर कड़े कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है।

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