नासिक का बहुचर्चित ‘फर्जी शालार्थ आईडी’ घोटाला: 50 अधिकारियों की 9 टीमें तैनात, 892 शिक्षक जांच के दायरे में
Nashik Shalarth ID Scam: नासिक संभाग के 'फर्जी शालार्थ आईडी' घोटाले की जांच के लिए 9 विशेष टीमें तैनात की गई हैं। सरकारी रिकॉर्ड से मेल न खाने वाली 892 आईडी की कड़ी जांच जारी है।
- Written By: रूपम सिंह
'फर्जी शालार्थ आईडी' (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik Fake Teacher ID Fraud: नासिक संभाग के बहुचर्चित ‘फर्जी शालार्थ आईडी’ घोटाले की अंतिम जांच ने अब रफ्तार पकड़ ली है। आड़गांव स्थित विभागीय शिक्षा मंडल कार्यालय में इस घोटाले की जड़ों तक पहुंचने के लिए 50 अधिकारियों की 9 विशेष टीमें तैनात की गई है। उच्च माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ। महेश पालकर ने बताया कि इस समय हर दिन करीब 300 शिक्षकों से कड़ी पूछताछ और क्रॉस-एग्जामिनेशन की जा रही है।
प्राथमिक जांच में यह सामने आया था कि नासिक संभाग के निजी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के करीब 892 शिक्षकों और कर्मचारियों की ‘शालार्थ आईडी’ सरकारी रिकॉर्ड के आधिकारिक जावक नंबर से मेल नहीं खा रही है। शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के इस हैरान करने वाले कारनामे ने पूरी शालार्थ प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
एक तरफ जहां फर्जी आईडी की जांच चल रही है। वहीं, दूसरी तरफ दूर-दराज से आए शिक्षकों को प्रशासनिक अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। आड़गांव का शिक्षा मंडल कार्यालय नासिक शहर के एक कोने में स्थित है, जहां पहुंचने के लिए सीधी सरकारी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते शिक्षकों को निजी वाहनों का महंगा सहारा लेना पड़ रहा है।
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शिक्षा मंडल कार्यालय में सुविधाओं का अभाव
कार्यालय परिसर में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण शिक्षकों को कड़कती धूप में और देर रात तक बाहर इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी नाराजगी है। इस महाघोटाले की जांच के लिए जलगांव, धुलिया, नंदुरबार और नासिक इन चारों जिलों के संदिग्ध शिक्षक और कर्मचारी शिक्षा मंडल कार्यालय पहुंच रहे हैं, जिससे वहां भारी भीड़ उमड़ रही है।
आगामी दो दिनों तक यह जांच प्रक्रिया दिन-रात इसी तरह जारी रहेगी। डॉ. पालकर ने स्पष्ट किया है कि काम के बढ़ते दायरे को देखते हुए यदि आवश्यकता पड़ी, तो रविवार को भी सुनवाई की जाएगी। इस पूरे मामले में हुई सुनवाई को बेहद निर्णायक माना जा रहा है।
