प्रशासन की कामचोरी, गुरुजनों को सजा, नासिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से 23 करोड़ का वेतन अटका

Nashik Teacher Salary Issue 2026: नासिक जिले के माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों का 23 करोड़ का वेतन लंबित। प्रशासनिक लापरवाही के कारण शिक्षक आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।
Administrative Dereliction and Punishment for Teachers: Salaries Worth ₹23 Crore Held Up Due to Negligence by the Nashik Education Department
नासिक जिला परिषद (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Teacher Salary Issue News: राष्ट्र का निर्माण करने वाले शिक्षकों के भविष्य पर आज खुद अंधकार छाया हुआ है। नासिक जिले के माध्यमिक और प्राथमिक स्कूलों के 2,343 शिक्षक और कर्मचारी पिछले 06 महीनों से वेतन की अनियमितता के कारण गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। प्रशासन की सुस्ती और कामचोरी की सजा आज उन गुरुओं को भुगतनी पड़ रही है, जो समाज का भविष्य संवारते हैं।

वेतन का गणित और प्रशासनिक सुस्ती

नासिक जिले में प्राथमिक वेतन पथक के अंतर्गत कुल 235 स्कूल आते हैं (185 नॉन-प्लान और 50 प्लान स्कूल)। इन सभी कर्मचारियों के वेतन के लिए प्रतिमाह 23 करोड़ रुपये के बजट की आवश्यकता होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि फंड उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रियाओं के नाम पर इस राशि को रोका जा रहा है। अधिकारियों के बीच चल रही आपसी जांच और 'डीटीएच अटैचमेंट' जैसे तकनीकी कार्यों को करने में शिक्षा विभाग की आनाकानी इस संकट की मुख्य वजह बनी हुई है।

ईएमआई का बोझ और बैंकों का 'जुर्माना'

वेतन न मिलने का सबसे भयावह असर शिक्षकों के सिबिल स्कोर और आर्थिक साख पर पड़ रहा है। अधिकांश शिक्षकों के होम लोन और अन्य ऋणों की EMI हर महीने की 05 तारीख को कटती है। वेतन 15 से 20 तारीख तक भी जमा न होने के कारण बैंक न केवल भारी पेनाल्टी (जुर्माना) लगा रहे हैं, बल्कि बाउंसिंग चार्ज के कारण शिक्षकों का हजारों का नुकसान हो रहा है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि कई घरों में राशन, बच्चों की फीस और बुजुर्गों की दवाइयों के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

अधिकारियों की मनमानी पर शिक्षक संगठनों का आक्रोश

निजी प्राथमिक महासंघ के अध्यक्ष नंदलाल धांडे ने तीखा सवाल उठाया है कि जब जिला परिषद स्कूलों में वेतन नियमित हो सकता है, तो निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ भेदभाव क्यों? सरकार ने हर महीने की 1 तारीख को वेतन देने का शासनादेश (GR) निकाला था, लेकिन नासिक के अधिकारी इसे रद्दी का टुकड़ा मान रहे हैं। शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि समायोजन के नाम पर उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री से 'न्याय' की गुहार

शिक्षक संगठनों ने अब हार मानकर सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मांगें स्पष्ट हैं की वेतन वितरण के लिए एक पारदर्शी और ठोस नीति बनाई जाए ताकि हर महीने की 1 तारीख को पैसा खाते में आए, वेतन रोकने वाले और कामचोरी करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय जांच हो, भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाए।