नासिक का मशहूर जेंटलमैन तेंदुआ 'टग्या' यादों में विलीन, रेस्क्यू टीम के सामने तोड़ा दम

Nashik Leopard Death News: नासिक के सातपुर और महिरावणी क्षेत्र में पिछले 12 सालों से रहने वाले शांत मिजाज तेंदुए 'टग्या' की प्राकृतिक मौत हो गई। फोटोग्राफर एकनाथ मंडल इस पर बना रहे थे डॉक्यूमेंट्री।
Akola Telhara Leopard Attack
तेंदुए की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Tagya Nashik Leopard Death: नासिक के वन्यजीव इतिहास का एक सुनहरा अध्याय समाप्त हो गया है। त्र्यंबक रोड, सातपुर और नंदिनी नदी के आसपास के इलाकों में पिछले एक दशक से अधिक समय से राज करने वाले बुजुर्ग तेंदुए, जिसे स्थानीय लोग प्यार से 'टग्या' कहते थे, की प्राकृतिक कारणों से मौत हो गई। 15 साल के इस 'बूढ़े राजा' ने वन विभाग की रेस्क्यू टीम की मौजूदगी में ही अपनी अंतिम सांस ली, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की आंखें नम हो गईं।

रेस्क्यू से पहले ही शांत हो गई धड़कनें

पिछले चार-पांच दिनों से टग्या वासाली और नंदिनी नदी के पास झाड़ियों में सुस्त अवस्था में दिखाई दे रहा था। स्थानीय नागरिकों की सूचना पर सहायक वन संरक्षक प्रशांत खैरनार और वन क्षेत्र अधिकारी सुमित निर्मल की टीम रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुँची। जब टीम झाड़ियों के करीब पहुँची, तो उन्होंने पाया कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर खड़ा यह तेंदुआ बहुत कमजोर और थका हुआ था। इलाज शुरू होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। शव परीक्षण (Post-mortem) के बाद पशु चिकित्सकों ने पुष्टि की कि उसकी मृत्यु पूरी तरह प्राकृतिक थी और शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं थे।

इंसानों का दोस्त: 12 सालों में कभी नहीं किया हमला

'टग्या' कोई आम तेंदुआ नहीं था, वह सातपुर और महिरावणी क्षेत्र की एक जीवित पहचान बन चुका था। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर एकनाथ मंडल, जो पिछले पांच सालों से इस शांत मिजाज तेंदुए पर एक डॉक्यूमेंट्री बना रहे थे, बताते हैं कि टग्या 2013 से इसी इलाके में घूम रहा था। इतने सालों में हजारों बार उसका सामना इंसानों से हुआ, लेकिन उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया। वह अपनी ही धुन में रहने वाला एक बेहद 'सभ्य' तेंदुआ माना जाता था, जिसने सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की थी।

गमगीन माहौल में अंतिम विदाई

टग्या के निधन की खबर फैलते ही नासिक के वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। शव परीक्षण के बाद गंगापुर रोड स्थित सरकारी नर्सरी में वन विभाग के नियमों के अनुसार ससम्मान उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वन अधिकारियों के अनुसार, टग्या ने अपनी पूरी उम्र जी ली थी और उसकी मौत एक प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा थी। हालांकि वह अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन नासिक की फिजाओं और फोटोग्राफर्स के कैमरों में उसकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।

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