बिना ‘प्लान’ के ₹25,000 करोड़ का दांव, नासिक सिंहस्थ कुंभ 2027 में महाघोटाले की आहट! आरटीआई में हुआ खुलासा
Simhastha Kumbh 2027: नासिक सिंहस्थ कुंभ 2027 में बिना एकीकृत योजना और डीपीआर के ₹25,000 करोड़ खर्च की तैयारी आरटीआई में उजागर हुई है, जिससे बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका बढ़ गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Kumbh Mela Budget (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Kumbh Scam: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेला 2027 के आयोजन में वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों और आरटीआई से खुलासा हुआ है कि प्रशासन बिना किसी एकीकृत विकास योजना के लगभग ₹25,000 करोड़ खर्च करने की तैयारी में है। नियम और कानूनों को ताक पर रखकर ‘योजना गायब और बिल जिंदा’ वाली नीति अपनाई जा रही है।
कुंभ मेला अधिनियम 2025 के तहत किसी भी कार्य से पहले एकीकृत विकास योजना बनाना अनिवार्य है, लेकिन यहां स्थिति ठीक इसके उलट नजर आ रही है। सरकारी मुहर के साथ बिना किसी डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के कार्यों को मंजूरी दी जा रही है। विशेषज्ञों का आरोप है कि यह सीधे तौर पर “खुला भ्रष्टाचार” है, जहां बिना किसी ब्लूप्रिंट के करदाताओं का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।
सिस्टम की जवाबदेही हुई ‘शून्य’
पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उनकी आरटीआई के जवाब में प्रशासन ने स्वीकार किया कि उनके पास कोई साझा विकास प्रारूप मौजूद नहीं है। शासन ने मंत्री समिति और उच्च स्तरीय प्राधिकरण तो बना दिए हैं, लेकिन धरातल पर वित्तीय नियंत्रण पूरी तरह शून्य नजर आ रहा है।
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विभागवार बंदरबांट: किसे कितना मिला?
- प्रशासनिक अराजकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर विभाग अपनी सुविधानुसार बजट बना रहा है
- नासिक मनपा: ₹3277.58 करोड़ की बड़ी जिम्मेदारी
- प्रस्तावित खर्च: प्रथम चरण के कार्यों के लिए ₹5140 करोड़ से अधिक का प्रावधान
- अघोषित व्यय: पुलिस, बिजली और जलसंपदा जैसे विभागों द्वारा बिना किसी केंद्रीय निगरानी के खर्च
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वित्तीय अनुशासन की बलि
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डीपीआर के फंड जारी करना आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। इससे न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में भ्रष्टाचार की जांच होने पर जवाबदेही तय करना भी लगभग असंभव हो जाएगा। 2027 का कुंभ आस्था का केंद्र बनने के बजाय प्रशासनिक विफलता और वित्तीय कुप्रबंधन का प्रतीक बनता नजर आ रहा है।
