प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया AI )
Nashik Onion Production: नासिक में प्याज का उत्पादन तो बढ़ा है, लेकिन दामों में गिरावट और मौसम का खराब होना किसानों के लिए चिंता की बात बन गया है। प्याज का उत्पादन का एरिया बढ़ कर 2.5 लाख हेक्टेयर हो गया है, लेकिन दाम 1300 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल होने से किसान अपनी उत्पादन की कीमत भी नहीं निकाल पा रहा है।
हर साल होने वाले इस बुरे चक्कर के खत्म होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है, इसलिए किसान खासे परेशान है। नासिक जिला भारत में प्याज प्रोडक्शन का एक बड़ा सेंटर है।
महाराष्ट्र राज्य का यह जिला देश के कुल प्याज उत्पादन का लगभग 34 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है। प्याज नासिक के किसानों की मुख्य फसल है, जो उनकी आय की रीढ़ है। हालांकि 2025-26 सीजन में नासिक में प्याज का प्रोडक्शन बढ़ा है, लेकिन दामों में उतार-चढ़ाव के कारण किसान परेशान हैं।
जिले में प्याज की पैदावार लासलगाव, पिपलगाव, चांदवड, सटाना, निफाड़ जैसे इलाकों में होता है। भारत के कुल प्याज प्रोडक्शन में महाराष्ट्र का हिस्सा 34 परसेंट से ज्यादा है। नासिक में प्याज प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी देखी गई है।
2025 में गर्मियों के प्याज प्रोडक्शन के लिए 2.5 लासा हेक्टेयर एरिया खेती के तहत आया, जो पिछले साल के 1.4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है, लेट खरीफ सीजन में 55 हजार हेक्टेयर में खेती पूरी हो गई।
यह एवरेज 42 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी सीजन में भी उत्पादन में बढ़ोत्तरी की संभावना है। क्योंकि अगर मौसम अच्छा रहा तो कुल उत्पादन 1.5-2 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। प्याज का उत्पादन तीन सीजन में होता है। सखरीफ (जून-अक्टूबर), लेट खरीफ (अक्टूबर-दिसंबर) और रबी (दिसंबर-मार्च)
2025 में खरीफ सीजन में ज्यादा बारिश की वजह से कुछ नुकसान हुआ था। इससे उत्पादन में 10-15 परसेंट की कमी आई थी। हालांकि, लेट खरीफ सीजन में किसानों ने इसकी भरपाई कर ली।
एवरेज प्रोडक्टिविटी 12-15 टन प्रति हेक्टेयर है, लेकिन बेहतर बीज और सिंचाई टेक्नोलॉजी की वजह से कुछ इलाकों में उत्पादन 20 टन तक हो रहा है।
नेशनल लेवल पर कर्नाटक में प्रोडक्टिविटी 12,831 किलो प्रति हेक्टेयर है। लेकिन नासिक में यह ज्यादा है। किसान प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी अपना रहे हैं। 2025 के मानसून में भारी बारिश से प्याज की पौध पर असर पड़ा, जिससे प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ गई।
2025 में, मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण खरीफ सीजन की फसल में देरी हुई। इससे नई फसल की उपलब्धता कम हो गई और कीमतें बढ़ गई। 2025-2026 में भारत का प्याज एक्सपोर्ट 1.15 करोड़ टन से ज्यादा होने की उम्मीद है।
लेकिन बांग्लादेश के इम्पोर्ट बंद करने के बाद नासिक में कीमतें गिर गई हैं। इससे किसानों को 175-200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लासलगांव एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी है।
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2025 में सरकारी खरीद में देरी के कारण किसानों को नुकसान हुआ। किसान संगठन नासिक में एक नेशनल प्याज सेंटर बनाने की तैयारी कर रहे हैं।