Amit Shah speech (सोर्सः सोशल मीडिया)
Navi Mumbai Program: नवी मुंबई के खारघर में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर ‘हिंद-दी-चादर’ शहीदी समागम का भव्य आयोजन किया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरु साहिब की स्मृति को नमन करते हुए उपस्थित संगत को संबोधित किया।
शाह ने अपने संबोधन में कहा कि यदि नौवें गुरु तेग बहादुर जी हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शहादत न देते, तो आज पूरे विश्व में एक भी हिंदू नहीं बचता। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि 1675 में औरंगज़ेब के शासनकाल में गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान न केवल देश की जनता का हौसला बढ़ाने वाला था, बल्कि इसने अत्याचार की शक्ति को भी तोड़ने का काम किया।
जब कश्मीरी पंडितों पर मुगल आक्रांताओं का अत्याचार बढ़ा और उन पर जबरन धर्म परिवर्तन का संकट आया, तब वे गुरु साहिब की शरण में पहुंचे। गुरु जी ने बिना एक पल की देरी किए उनकी रक्षा का संकल्प लिया और अपना शीश न्यौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु तेग बहादुर जी युगों-युगों तक हमारी प्रेरणा रहेंगे।
सिख धर्म के नौवें गुरु श्री तेग बहादुर जी के महाराष्ट्र के नवी मुंबई में आयोजित 350वें शहीदी समागम समारोह से लाइव… ਸਿੱਖ ਧਰਮ ਦੇ ਨੌਵੇਂ ਗੁਰੂ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਜੀ ਦੇ 350ਵੇਂ ਸ਼ਹੀਦੀ ਦਿਹਾੜੇ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਨਵੀਂ ਮੁੰਬਈ ਵਿੱਚ ਆਯੋਜਿਤ ਸਮਾਗਮ ਤੋਂ ਲਾਈਵ… https://t.co/KSwRpr5NI1 — Amit Shah (@AmitShah) March 1, 2026
शाह ने कहा कि गुरु नानक देव जी महाराज ने ‘नाम जपो, कीरत करो और वंड छको’ का मंत्र देकर भारत की हजारों साल पुरानी परंपरा को नया जीवन दिया। यही आपसी साझेदारी आगे चलकर लंगर और साझे चूल्हे में परिवर्तित हुई और मुगलों के विरुद्ध संघर्ष की ताकत का आधार बनी।
उन्होंने बताया कि दसों सिख गुरुओं ने अपने-अपने काल में समाज को अलग-अलग प्रकार की शक्ति दी। गुरु अंगद देव जी ने शिक्षा का प्रसार किया, गुरु अमर दास जी ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया, गुरु अर्जन देव जी ने सांस्कृतिक समावेशिता के लिए काम किया और गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कर एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में भाला लेकर अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का सूत्रपात किया। शाह ने कहा कि ‘सरबंसदानी’ गुरु गोबिंद सिंह जी जैसा पराक्रमी योद्धा इतिहास में दूसरा कोई नहीं हुआ, जिन्होंने स्वधर्म के लिए अपने पूरे परिवार का बलिदान दे दिया।
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने समापन में कहा कि दसों गुरुओं के जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म परिवर्तन के विरुद्ध सभी देशवासियों को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब में संत नामदेव, कबीर और संत रविदास जैसे महान संतों के पदों का समावेश भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रमाण है।
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यह समागम नागपुर और नांदेड के बाद नवी मुंबई में संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर राष्ट्रीय स्तर पर इस शहीदी दिवस को मनाने का निर्णय लिया गया था। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सिख, बंजारा, वाल्मीकि, लबाना और सिकलीगर समेत आठ प्रमुख समाजों के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में समागम में भाग लिया।